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SC : सुप्रीम कोर्ट ने विधायकों की अयोग्यता पर रिपोर्ट देने को स्पीकर को दिए दो हफ्ते

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: January 16, 2026 • 10:10 PM
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हैदराबाद। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश दिया कि वे कांग्रेस में शामिल हुए बीआरएस विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर की जा रही कार्रवाई की जानकारी दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करें। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एजी मसीह (Justice AG Masih) की पीठ ने विधानसभा अध्यक्ष को दो सप्ताह का समय देते हुए स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। इससे पहले स्पीकर की ओर से कार्यवाही पूरी करने के लिए आठ सप्ताह का समय मांगा गया था।

सात मामलों में फैसला हो चुका है, जबकि एक मामला अभी लंबित

सुनवाई के दौरान विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी और मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि सात मामलों में फैसला हो चुका है, जबकि एक मामला अभी लंबित है। सिंघवी ने कहा कि आंखों की सर्जरी के कारण स्पीकर सभी मामलों पर समय से निर्णय नहीं ले सके। वहीं बीआरएस विधायकों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्रि नायडू ने अतिरिक्त समय दिए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अदालत पहले ही तीन महीने का समय दे चुकी है, जो काफी पहले समाप्त हो चुका है। पीठ ने स्पष्ट किया कि यह स्पीकर को दिया गया अंतिम अवसर होगा और समयसीमा का पालन न होने पर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। अगली सुनवाई से पहले स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए गए।

सुप्रीम कोर्ट का अध्यक्ष कौन होता है?

देश में सर्वोच्च न्यायालय का नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश करते हैं, जिन्हें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया कहा जाता है। जनवरी 2026 में यह जिम्मेदारी न्यायमूर्ति सूर्यकांत निभा रहे हैं, जो संवैधानिक पीठों की अध्यक्षता और न्यायिक प्रशासन की प्रमुख भूमिका में होते हैं।

भारत में कुल कितने हाई हैं?

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार देश में 25 उच्च न्यायालय कार्यरत हैं। ये अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए न्यायिक अपील, संवैधानिक निगरानी और निचली अदालतों के फैसलों की समीक्षा का कार्य करते हैं।

125 सीआरपीसी पर सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला क्या है?

हालिया संवैधानिक निर्णय में यह स्पष्ट किया गया है कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाएं भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता पाने की हकदार हैं। यह अधिकार धर्म से ऊपर मानवीय गरिमा और समानता के सिद्धांत पर आधारित बताया गया है।

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