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Politics : अध्यक्ष का फैसला लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध – भाजपा अध्यक्ष

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: March 12, 2026 • 10:11 AM
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हैदराबाद। तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव (N. Ramachandra Rao) ने बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज किए जाने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध बताया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जनता ने स्पष्ट रूप से देखा है कि एक दल से चुना गया विधायक कुछ ही महीनों में दूसरे दल में चला गया और उसी दल के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव भी लड़ रहा है। उन्होंने कहा, इतने स्पष्ट प्रमाण होने के बावजूद यह कहना कि इसे दलबदल (Defection) नहीं माना जाएगा, आश्चर्यजनक है।

जनता के जनादेश की अवहेलना

उन्होंने कहा कि यह निर्णय जनता के जनादेश की अवहेलना करता है। रामचंदर राव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी सवाल किया और याद दिलाया कि दलबदल विरोधी कानून पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में लागू किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल का रुख दलबदल की घटनाओं को संरक्षण देता हुआ प्रतीत होता है और यह निर्णय लोकतंत्र तथा संविधान का अपमान है।

दलबदल का क्या अर्थ है?

राजनीति में वह स्थिति जब कोई निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपने मूल राजनीतिक दल को छोड़कर किसी दूसरे दल में शामिल हो जाता है, उसे दलबदल कहा जाता है। यह अक्सर सत्ता, पद या राजनीतिक लाभ के कारण होता है। भारत में दलबदल को रोकने के लिए कानून बनाया गया है ताकि चुने हुए प्रतिनिधि बिना उचित कारण के बार-बार पार्टी न बदलें और लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थिर बनी रहे।

दलबदल क्या है कौन सा संविधान?

भारतीय संविधान में दलबदल से संबंधित प्रावधान दसवीं अनुसूची में दिया गया है, जिसे दलबदल विरोधी कानून कहा जाता है। यह व्यवस्था सांसदों और विधायकों पर लागू होती है। यदि कोई सदस्य अपनी पार्टी छोड़ देता है या पार्टी के निर्देश के विरुद्ध मतदान करता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है। यह नियम राजनीतिक दलों में अनुशासन बनाए रखने और सरकार की स्थिरता के लिए बनाया गया है।

दलबदल का मतलब क्या होता है?

राजनीतिक दल बदलने की प्रक्रिया को दलबदल कहा जाता है। जब कोई सांसद या विधायक अपने चुनाव के बाद उस दल को छोड़ देता है जिसके टिकट पर वह चुना गया था और किसी अन्य दल में शामिल हो जाता है, तो इसे दलबदल माना जाता है। कई बार यह व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता है, इसलिए इसे नियंत्रित करने के लिए भारत में विशेष कानून लागू किया गया है।

52वां संविधान संशोधन क्या था?

सन् 1985 में किया गया 52वां संविधान संशोधन भारत के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस संशोधन के माध्यम से संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसे दलबदल विरोधी कानून कहा जाता है। इसका उद्देश्य सांसदों और विधायकों द्वारा बार-बार दल बदलने की प्रवृत्ति को रोकना था। इस कानून के तहत दल बदलने वाले जनप्रतिनिधियों की सदस्यता समाप्त करने का प्रावधान रखा गया।

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