26 लाख रुपए के चुराए गए गहनें बरामद
हैदराबाद। कुकटपल्ली (Kukatpally) ज़ोन के सीसीएस टीम और केपीएचबी पुलिस की लॉ एंड ऑर्डर शाखा ने एक कुख्यात अंतर-राज्यीय मंदिर चोरी गिरोह का पर्दाफाश किया। कार्रवाई में श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, सरदार पटेल नगर, केपीएचबी कॉलोनी से चुराए गए लगभग 26 लाख रुपए के सोने, चांदी और तांबे के गहनों की बरामदगी की गई। बीते 7 जनवरी की सुबह 7 बजे, मंदिर प्रबंधक कंडुला मारुति (Kandula Maruti) ने शिकायत दर्ज कराई कि 6 और 7 जनवरी की रात अज्ञात चोरों ने मंदिर के गर्भ गृह को तोड़कर सोने और चांदी के आभूषण चोरी कर लिए। मामला केपीएचबी पुलिस स्टेशन में तहत दर्ज किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में विशेष टीम ने संभावित प्रवेश और पलायन मार्गों पर 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया।
पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को किया गिरफ्तार
तकनीकी निगरानी, संदिग्ध डेटाबेस जांच और आपराधिक तरीकों के मिलान के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। पुलिस ने इस मामले में महाराजु मल्लिकार्जुन, दुन्नापोथुला पवन कल्याण, डंडी अनिल तेजा, कंबापु विजय, तंगिला मणिकांत दुर्गा प्रसाद को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले के दो आरोपी नीलापुर नीलैय्या और बश्या वेनकट मोहित कुमार फरार है। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी आरोपी नीलापुर नीलैय्या पहले 15 संपत्ति और डकैती मामलों में शामिल, जबकि मोहित कुमार पहले गांजा से संबंधित मामले में संलिप्त रहा। नीलापुर नीलैय्या और अन्य आरोपी मंदिर चोरी की साजिश में शामिल थे। अन्य साथी आरोपियों ने चोरी की गई संपत्ति को बेचने में मदद की। लगभग 26 लाख रुपए मूल्य के सोने और चांदी के आभूषण और मूर्तियां बरामद की गई है।

बरामद का पर्यायवाची शब्द क्या है?
प्राप्त, हासिल, खोजा हुआ, मिला हुआ और उपलब्ध जैसे शब्द इसके समान अर्थ में प्रयोग किए जाते हैं। सामान्यतः यह शब्द तब उपयोग होता है जब कोई वस्तु प्रयास या जांच के बाद कहीं से मिलती है, विशेषकर प्रशासनिक या कानूनी संदर्भों में इसका अधिक प्रयोग होता है।
बरामदगी क्या होती है?
किसी स्थान से छिपी, खोई या अवैध वस्तु को ढूंढकर कब्जे में लेने की प्रक्रिया को बरामदगी कहा जाता है। पुलिस या जांच एजेंसियां जांच के दौरान हथियार, धन, दस्तावेज या अन्य सामग्री मिलने पर इस शब्द का प्रयोग करती हैं।
ब्रमद का अर्थ क्या है?
यह शब्द प्रायः बरामद का ही अशुद्ध या बोलचाल में प्रयोग किया जाने वाला रूप माना जाता है। आशय वही होता है, यानी किसी वस्तु का मिलना या प्राप्त होना। औपचारिक और लिखित भाषा में सही शब्द बरामद का ही उपयोग किया जाता है।
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