हैदराबाद। सिंगरेणी कोल माइन टेंडर (Singareni Coal Mine Tender) में गड़बड़ियों के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार में गड़बड़ियों की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि मीडिया आउटलेट्स के बीच मतभेदों के कारण उनकी पार्टी के नेताओं और सरकार की छवि धूमिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। खम्मम जिले के दौरे के दौरान, रेवंत रेड्डी ने रविवार को एडुलापुरम नगरपालिका में विकास पहलों का शुभारंभ किया। उन्होंने नर्सिंग कॉलेज (Nursing College), मड्डुलपल्ली कृषि बाजार, जेएनटीयू कॉलेज और कुसुमंची में 100-बेड का सरकारी अस्पताल सहित विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला समारोह में भी हिस्सा लिया।
सिंगरेनी कोल माइनिंग में किसी भी प्रकार की भ्रष्टाचार की जगह नहीं
इसके बाद उन्होंने निर्वाचित अधिकारियों से मुलाकात की और स्पष्ट किया कि अगर किसी को पार्टी नेताओं के बारे में कोई चिंता है, तो सीधे उनके पास आएं; परिवार के मुखिया के रूप में वे स्पष्टीकरण देने के लिए तैयार हैं। रेवंत रेड्डी ने कहा, बिना आधार के आरोप लगाना अनुचित है। सिंगरेनी कोल माइनिंग में किसी भी प्रकार की भ्रष्टाचार की जगह नहीं है। मैं इस प्रतिबद्धता पर खड़ा हूं। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि क्योंकि पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी खम्मम के मंत्री हैं, इसलिए संयुक्त जिले में विकास तेजी से हो रहा है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि नगर पालिका चुनावों में कांग्रेस पार्टी को भारी बहुमत से जीत दिलाने का काम करें। रेवंथ रेड्डी ने खम्मम जिले के मंत्रियों के नेतृत्व में भद्राचलम मंदिर का विकास कराने का भी आह्वान किया, ताकि इसे अयोध्या राम मंदिर की तरह विकसित किया जा सके।
कोल माइंस का मतलब क्या होता है?
कोयले के खनन से जुड़ी जगहों और कार्यों को यह कहा जाता है। जमीन के ऊपर या नीचे स्थित खदानों से कोयला निकालकर बिजली उत्पादन, उद्योगों और ईंधन की जरूरतों को पूरा किया जाता है, इसलिए ऊर्जा क्षेत्र में इसका विशेष महत्व होता है।
1 किलो कोयले की कीमत क्या है?
दरअसल कीमत कोयले की गुणवत्ता, ग्रेड और उपयोग पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर भारत में कोयले की औसत दर लगभग 8 से 15 रुपये प्रति किलो के आसपास मानी जाती है, जबकि औद्योगिक उपयोग के लिए कीमत थोक में अलग हो सकती है।
कोल इंडिया में कितनी कंपनियां हैं?
सरकारी क्षेत्र की इस महारत्न कंपनी के अंतर्गत कुल 7 सहायक कंपनियां कार्यरत हैं। ये अलग-अलग राज्यों में कोयला खनन और उत्पादन का कार्य संभालती हैं और देश की अधिकांश कोयला जरूरतों की पूर्ति करती हैं।
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