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Election : नगर निकाय चुनावों के लिए कड़ा सुरक्षा प्रबंध – डीजीपी

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: February 10, 2026 • 10:33 PM
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मतदाता निडर होकर अपने मताधिकार का प्रयोग करें

हैदराबाद। भाजपा (BJP) प्रदेश राज्य में 7 नगर निगमों और 116 नगरपालिकाओं के लिए बुधवार को होने वाले मतदान को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह जानकारी पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी ने दी। मंगलवार को अपने कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए डीजीपी ने बताया कि राज्यभर में स्थापित 8,203 मतदान केंद्रों पर पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इनमें से 1,302 मतदान केंद्रों को अत्यंत संवेदनशील और 1,926 केंद्रों को संवेदनशील घोषित करते हुए वहां अतिरिक्त सुरक्षा बल (security forces) तैनात किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है। अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में मतदान केंद्रों के बाहर भी निगरानी कैमरों के माध्यम से सतत निगरानी रखी जा रही है। शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 3,000 अतिरिक्त बलों को तैनात किया गया है। इनमें टीजीएसपी के साथ-साथ वन, आबकारी, सीआईडी और लीगल मेट्रोलॉजी विभागों के कर्मचारी भी शामिल हैं।

लागू हो गया साइलेंट पीरियड

डीजीपी ने बताया कि सोमवार शाम 5 बजे से चुनाव प्रचार समाप्त होने के साथ ही साइलेंट पीरियड लागू हो गया है। इसके मद्देनज़र विजिबल पुलिसिंग बढ़ा दी गई है और गश्त को और सख्त किया गया है। चुनावी आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद 27 जनवरी से अब तक पुलिस द्वारा व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाए गए हैं, जिनमें कुल 3.09 करोड़ रुपये मूल्य की नकदी और अन्य सामग्री जब्त की गई है।

इसमें 1.29 करोड़ रुपये नकद, 1.21 करोड़ रुपये मूल्य की शराब, 15.7 लाख रुपये के मादक पदार्थ तथा 28.69 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण शामिल हैं। अवैध परिवहन पर रोक लगाने के लिए पड़ोसी राज्यों की सीमाओं पर 20 चेक पोस्ट और जिलों की सीमाओं पर 55 चेक पोस्ट स्थापित किए गए हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमाओं पर विशेष जांच अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके लिए 181 फ्लाइंग स्क्वॉड और 167 स्टैटिक सर्विलांस टीमें कार्यरत हैं।

1,183 लाइसेंसी हथियार जमा कराए गए

एहतियाती कदम के तहत राज्यभर में 1,183 लाइसेंसी हथियार जमा कराए गए हैं तथा शांति भंग करने की आशंका वाले 4,318 लोगों को बाउंडओवर किया गया है। विभिन्न मामलों में लंबित 398 गैर-जमानती वारंटों का भी क्रियान्वयन किया गया है। चुनाव नियमों के उल्लंघन से संबंधित अब तक 142 एफआईआर दर्ज की गई हैं।

डीजीपी ने बताया कि चुनाव संचालन से जुड़े जमीनी स्तर के अधिकारियों को पहले ही व्यापक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के प्रलोभन में न आएं और बिना किसी भय के अपने संवैधानिक मताधिकार का प्रयोग करें। इस अवसर पर अतिरिक्त डीजीपी (कानून एवं व्यवस्था) महेश एम. भागवत सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

DGP से ऊपर कौन होता है?

प्रशासनिक ढांचे में डीजीपी राज्य पुलिस का सर्वोच्च पद होता है, इसलिए पुलिस विभाग के भीतर उससे ऊपर कोई पद नहीं होता। हालांकि प्रशासनिक दृष्टि से राज्य का गृह सचिव, मुख्य सचिव और अंततः मुख्यमंत्री डीजीपी से ऊपर माने जाते हैं। ये अधिकारी और निर्वाचित प्रतिनिधि नीतिगत निर्णय लेते हैं, जिनका पालन पुलिस प्रमुख को करना होता है। इस तरह पदानुक्रम अलग-अलग सेवाओं के अनुसार तय होता है।

डीजीपी का मतलब क्या होता है?

इस पद का पूरा नाम Director General of Police होता है। हिंदी में इसे पुलिस महानिदेशक कहा जाता है। यह अधिकारी पूरे राज्य की पुलिस व्यवस्था का प्रमुख होता है और कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, पुलिस प्रशासन तथा अनुशासन से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी संभालता है। डीजीपी आमतौर पर भारतीय पुलिस सेवा के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से होता है और उसका कार्यक्षेत्र पूरे राज्य तक फैला होता है।

DGP की नियुक्ति कौन करता है?

इस पद पर नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है। चयन प्रक्रिया में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा तय दिशा-निर्देशों और सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन किया जाता है। योग्य वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के पैनल में से राज्य सरकार एक अधिकारी को डीजीपी नियुक्त करती है। अंतिम नियुक्ति आदेश राज्य के राज्यपाल के नाम से जारी होता है, लेकिन वास्तविक निर्णय सरकार लेती है।

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