हैदराबाद। उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आगामी शैक्षणिक वर्ष से पहले सभी गुरुकुल स्कूलों (Gurukul Schools) को पूरी तरह तैयार किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही (Negligence) बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने खम्मम जिला कलेक्टर दिवाकर टीएस, अतिरिक्त कलेक्टर डॉ. पी. श्रीजा, पुलिस आयुक्त सुनील दत्त और अन्य अधिकारियों के साथ बुधवार को कलेक्ट्रेट में गुरुकुल एवं वेलफेयर रेजिडेंशियल शैक्षणिक संस्थानों की समीक्षा बैठक की। बैठक में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जिले में हर वर्ष गुरुकुल स्कूलों में प्रवेश बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। जिन आवासीय स्कूलों में सीटें खाली रहती हैं, उनका अध्ययन कर कारणों की पहचान की जाए और तत्काल समाधान किया जाए।
गुरुकुल संस्थानों की तैयारी पर डिप्टी सीएम का सख्त निर्देश
उन्होंने कहा कि नया शैक्षणिक वर्ष 12 जून से शुरू हो रहा है, इसलिए सभी संस्थानों को उससे पहले पूरी तरह तैयार किया जाए तथा गर्मियों में ही मरम्मत और बुनियादी ढांचे के कार्य पूरे किए जाएं। भट्टी विक्रमार्क ने निर्देश दिया कि सभी आवासीय स्कूलों में डाइट चार्ज और मेन्यू की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए। साथ ही प्रत्येक गुरुकुल संस्था के लिए जिला स्तरीय अधिकारी को प्रभारी नियुक्त किया जाए, जो हर महीने निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि जिला अधिकारी नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करें और निरीक्षण रिपोर्ट अनिवार्य रूप से दर्ज करें। विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की मासिक जांच के लिए डॉक्टरों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
आवश्यक मरम्मत कार्य लगातार जारी रखने के निर्देश
उन्होंने किराए की इमारतों में चल रहे गुरुकुल संस्थानों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने तथा आवश्यक मरम्मत कार्य लगातार जारी रखने के निर्देश दिए। उपमुख्यमंत्री ने वर्तमान में निर्माणाधीन पांच यंग इंडिया इंटीग्रेटेड स्कूल भवनों के कार्य में तेजी लाने को भी कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक गुरुकुल संस्थानों की स्थिति का आकलन कर यह योजना तैयार की जाए कि यंग इंडिया स्कूलों के पूरा होने पर किन संस्थानों को स्थानांतरित किया जा सकता है।
क्षेत्रीय समन्वयकों को अगले 12 दिनों में चेकलिस्ट के अनुसार सभी स्कूलों का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि आगामी शैक्षणिक वर्ष के लिए छात्रों को समय पर पाठ्यपुस्तकें और यूनिफॉर्म उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। डिप्टी सीएम ने कहा कि सरकार शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और इसमें भारी धनराशि खर्च की जा रही है, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
शैक्षणिक वर्ष का मतलब क्या होता है?
स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय में पढ़ाई और परीक्षाओं के लिए निर्धारित अवधि को शैक्षणिक वर्ष कहा जाता है। इसमें कक्षाएं, परीक्षाएं, छुट्टियां और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां शामिल होती हैं। अधिकांश संस्थानों में यह अवधि लगभग एक वर्ष की होती है। अलग-अलग शिक्षा बोर्ड और विश्वविद्यालयों के अनुसार इसका समय अलग हो सकता है।
2026 का शैक्षणिक वर्ष क्या है?
शिक्षण संस्थानों में 2026-27 सत्र को शैक्षणिक वर्ष 2026 माना जा सकता है। कई स्कूलों और कॉलेजों में नया सत्र अप्रैल, जून या जुलाई से शुरू होता है और अगले वर्ष तक चलता है। अलग-अलग राज्यों, बोर्डों और विश्वविद्यालयों के अनुसार शैक्षणिक कैलेंडर बदल सकता है। इसमें प्रवेश, कक्षाएं, परीक्षा और अवकाश की समय-सारणी निर्धारित की जाती है।
एक शैक्षणिक वर्ष में कितने कार्य दिवस होते हैं?
स्कूलों और कॉलेजों में कार्य दिवसों की संख्या शिक्षा बोर्ड और संस्थान के नियमों के अनुसार तय होती है। सामान्य तौर पर एक शैक्षणिक वर्ष में लगभग 180 से 220 कार्य दिवस माने जाते हैं। इसमें नियमित कक्षाएं, परीक्षा और शैक्षणिक गतिविधियां शामिल होती हैं। छुट्टियों और स्थानीय नियमों के अनुसार यह संख्या अलग हो सकती है।
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