हैदराबाद। तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं एमएलसी महेश कुमार गौड़ (Mahesh Kumar Gaur) ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनगणना प्रक्रिया में जाति गणना को शामिल किए जाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी लंबे समय से देश में व्यापक जाति जनगणना की मांग करती रही है, क्योंकि यह सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को दूर करने के लिए आवश्यक कदम है। महेश कुमार गौड़ ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) के दौरान भी देशभर में जाति गणना की आवश्यकता पर जोर दिया था और इसे सामाजिक न्याय के लिए जरूरी बताया था। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक और पारदर्शी जाति जनगणना से पिछड़े और वंचित वर्गों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में न्याय और अवसर सुनिश्चित किए जा सकते हैं।
देशव्यापी जाति जनगणना की मांग दोहराई
टीपीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि तेलंगाना में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में कराए गए जाति सर्वेक्षण को पारदर्शी और सफल माना जा रहा है, जो देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना सरकार द्वारा किया गया यह सर्वे यह दर्शाता है कि सुव्यवस्थित तरीके से सामाजिक आंकड़े एकत्र किए जा सकते हैं। महेश कुमार गौड़ ने केंद्र सरकार से अपील की कि तेलंगाना मॉडल को अपनाते हुए पूरे देश में व्यापक जाति जनगणना कराई जाए, जिससे सामाजिक न्याय, समान अवसर और कल्याणकारी योजनाओं का सही वितरण सुनिश्चित हो सके।
जाति गणना का मतलब क्या होता है?
जनसंख्या सर्वेक्षण के दौरान लोगों की सामाजिक श्रेणियों और समुदायों से जुड़ी जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया को जाति गणना कहा जाता है। इसका उद्देश्य विभिन्न वर्गों की संख्या, सामाजिक स्थिति और सरकारी योजनाओं की आवश्यकता को समझना होता है। इस प्रकार के आंकड़ों का उपयोग नीति निर्माण और कल्याणकारी योजनाओं में किया जा सकता है। भारत में जनगणना के दौरान कई सामाजिक और आर्थिक जानकारी भी दर्ज की जाती हैं। यह विषय अक्सर सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बना रहता है।
क्या 2026 में जाति गणना होगी?
केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों की ओर से समय-समय पर जाति आधारित सर्वेक्षण और जनगणना को लेकर चर्चा होती रही है। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर 2026 में आधिकारिक जाति गणना को लेकर अंतिम निर्णय और विस्तृत कार्यक्रम की जानकारी सरकार द्वारा घोषित की जाएगी। कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर सामाजिक सर्वेक्षण कराए हैं। जनगणना से जुड़ी प्रक्रिया केंद्र सरकार और संबंधित विभागों के निर्देशों के अनुसार तय होती है।
7 जाति कौन-कौन सी होती हैं?
भारतीय समाज में हजारों जातियां और उपजातियां पाई जाती हैं, इसलिए केवल सात जातियों की निश्चित सूची नहीं मानी जाती। सामाजिक और प्रशासनिक रूप से सामान्य वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति जैसी श्रेणियां उपयोग में लाई जाती हैं। अलग-अलग राज्यों और समुदायों में जातियों के नाम और वर्गीकरण अलग हो सकते हैं। ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय आधार पर इनकी विविधता काफी व्यापक मानी जाती है।
जाति जनगणना कब शुरू होगी?
सरकारी स्तर पर जनगणना और उससे जुड़े सर्वेक्षण की तारीखें आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से घोषित की जाती हैं। अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर जाति जनगणना की अंतिम शुरुआत तिथि को लेकर अलग-अलग चर्चाएं चलती रही हैं। केंद्र सरकार द्वारा प्रक्रिया, नियम और समय-सीमा तय किए जाने के बाद ही आधिकारिक कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। जनगणना कार्य में डेटा संग्रह, सत्यापन और प्रशासनिक तैयारियां भी शामिल होती हैं।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :