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Hyderabad : चारमीनार क्षेत्र में रास्ता रोकने वाले दो फेरीवालों को जेल और जुर्माना

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: May 21, 2026 • 5:32 PM
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हैदराबाद। चारमीनार क्षेत्र में सार्वजनिक रास्तों पर कब्जा कर लोगों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न करने वाले दो फेरीवालों को अदालत ने दोषी ठहराते हुए जेल (Jail) और जुर्माने की सजा सुनाई है। यह कार्रवाई चारमीनार थाना पुलिस द्वारा दर्ज किए गए डिजिटल लघु मामलों के आधार पर की गई।चारमीनार थाना प्रभारी टी रामबाबू ने बताया कि गांधी भवन स्थित प्रथम विशेष न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय ने दोनों मामलों की सुनवाई के बाद आरोपियों को दोषी पाया। पहले मामले में खिलवत निवासी 46 वर्षीय महेर उन्निसा को पैदल यात्रियों और वाहनों की आवाजाही (Movement) में गंभीर बाधा उत्पन्न करने के आरोप में दोषी ठहराया गया। न्यायालय ने उन्हें एक दिन के साधारण कारावास तथा 100 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

सार्वजनिक सड़क पर अवैध रूप से ढांचा खड़ा करने का पाया गया दोषी

दूसरे मामले में खिलवत निवासी 26 वर्षीय सैयद अब्दुल अमैर को ऐतिहासिक स्मारक के निकट सार्वजनिक सड़क पर अवैध रूप से ढांचा खड़ा करने का दोषी पाया गया। अदालत ने उसे दो दिन के साधारण कारावास और 100 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इन मामलों की जांच उपनिरीक्षक के राजशेखर तथा न्यायालय ड्यूटी अधिकारी महेंद्र ने की। अदालत के आदेश के बाद दोनों दोषियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। थाना प्रभारी ने कहा कि चारमीनार क्षेत्र में सड़कों और पैदल मार्गों पर कब्जा सार्वजनिक सुरक्षा, पर्यटकों की सुविधा और आपातकालीन सेवाओं के लिए गंभीर समस्या बन रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस डिजिटल लघु मामला प्रणाली के माध्यम से ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई कर रही है। उन्होंने फेरीवालों और व्यापारियों से निर्धारित स्थानों पर ही व्यापार करने तथा सार्वजनिक रास्तों को खाली रखने की अपील की।

चारमीनार किसने बनवाया था और क्यों?

निर्माण मोहम्मद कुली कुतुब शाह ने वर्ष 1591 में करवाया था। माना जाता है कि शहर में फैली महामारी समाप्त होने की खुशी में इस ऐतिहासिक स्मारक का निर्माण कराया गया। यह इमारत हैदराबाद शहर की पहचान मानी जाती है। चारों दिशाओं में बने विशाल मेहराब और मीनारें इसकी खास विशेषता हैं। आज यह भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।

चारमीनार का इतिहास क्या है?

कुतुब शाही काल की प्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारत है। इसका निर्माण 16वीं शताब्दी में हैदराबाद शहर की स्थापना के समय किया गया था। यह स्मारक इस्लामी और फारसी वास्तुकला का सुंदर उदाहरण माना जाता है। इसके आसपास पुराने बाजार और सांस्कृतिक क्षेत्र विकसित हुए, जो आज भी काफी लोकप्रिय हैं। ऐतिहासिक महत्व और स्थापत्य कला के कारण यह दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है।

चारमीनार की कहानी क्या है?

हैदराबाद शहर की स्थापना और महामारी समाप्त होने से जुड़ी कथाओं के कारण यह स्मारक काफी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि शासक ने लोगों की सुरक्षा और शांति के लिए प्रार्थना की थी, जिसके बाद इस इमारत का निर्माण कराया गया। चार ऊंची मीनारों के कारण इसे “चारमीनार” नाम दिया गया। समय के साथ यह शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान बन गया। आसपास का क्षेत्र मोतियों, चूड़ियों और पारंपरिक बाजारों के लिए भी जाना जाता है।

चारमीनार में कितनी मंजिल है?

चारमीनार कुल चार मंजिलों वाली ऐतिहासिक इमारत मानी जाती है। इसकी प्रत्येक मीनार कई स्तरों में बनी हुई है और ऊपर जाने के लिए घुमावदार सीढ़ियां बनाई गई हैं। ऊपरी हिस्से से पुराने हैदराबाद का दृश्य देखा जा सकता है। वास्तुकला और डिजाइन की वजह से यह स्मारक विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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