हैदराबाद। वीर हनुमान विजयोत्सव के अवसर पर फतेहनगर डिवीजन के शिव शंकर नगर (Shiv Shankar Nagar) स्थित श्री हनुमान देवस्थान में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। भारी संख्या में लोगों ने भगवान बजरंग बली के दर्शन-पूजन किया। इस मौके पर दर्शन पूजन के पश्चात अन्न प्रसाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें टीपीसीसी प्रोटोकॉल सचिव सूरज तिवारी ने प्रमुख अतिथि के रूप में भाग लिया।
कार्यक्रम में फतेहनगर डिवीजन के कांग्रेस नेता के. राजू मुदिराज, डिवीजन महासचिव के. क्रांति मुदिराज, मेडचल-मल्काजगिरी जिला युवा कांग्रेस के महासचिव चीटकौरु कृष्ण (Chitkouru Krishna), शिवालयम सचिव माधुरी सतीश समेत अन्य स्थानीय नेता और बड़ी संख्या में समाजसेवी उपस्थित रहे। इस अवसर पर सूरज तिवारी ने हनुमान जयंती की भक्ति और सेवा भाव को साझा करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक और सामाजिक आयोजनों से समुदाय में एकता और भाईचारे की भावना मजबूत होती है। कार्यक्रम में विशेष रूप से अन्न प्रसाद वितरण को प्राथमिकता दी गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित कर भक्ति एवं सेवा का संदेश दिया गया।
वीर हनुमान सिंह का जन्म कहाँ हुआ था?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी का जन्म कर्नाटक के अंजनेयाद्री पहाड़ी (हंपी क्षेत्र) में माना जाता है। कुछ मान्यताओं में अन्य स्थानों का भी उल्लेख मिलता है, लेकिन अंजनेयाद्री पहाड़ी को सबसे प्रमुख जन्मस्थान माना जाता है। वे माता अंजना और केसरी के पुत्र थे और पवन देव के आशीर्वाद से उत्पन्न हुए माने जाते हैं।
संकट में कौन सा मंत्र है?
कठिन समय या संकट में हनुमान जी की उपासना अत्यंत फलदायी मानी जाती है। “हनुमान चालीसा” और “बजरंग बाण” का पाठ विशेष रूप से किया जाता है। इसके अलावा “ॐ हनुमते नमः” मंत्र का जप भी संकट दूर करने के लिए प्रभावी माना जाता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इन मंत्रों का जाप करने से मन को शांति और साहस मिलता है।
वीर हनुमान जी का इतिहास क्या है?
रामायण के अनुसार हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त और वानर सेना के प्रमुख योद्धा थे। उन्होंने माता सीता की खोज, लंका दहन और युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे अपार शक्ति, बुद्धि और निष्ठा के प्रतीक माने जाते हैं। उनका जीवन भक्ति, सेवा और साहस का आदर्श उदाहरण है, जिसके कारण उन्हें “संकट मोचन” भी कहा जाता है।
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