भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को स्वामी विवेकानंद एक्सीलेंस अवॉर्ड
हैदराबाद। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व विधान परिषद सदस्य एन. रामचंद्र राव (N. Ramachandra Rao) को स्वामी विवेकानंद एक्सीलेंस अवॉर्ड–2026 से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती के अवसर पर तेलंगाना मेधावी फोरम (Telangana Meritorious Forum) की राज्य इकाई के तत्वावधान में तारनाका स्थित उनके आवास पर आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। इस अवसर पर एन. रामचंद्रराव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने सनातन धर्म की महानता को विश्व पटल पर गर्व के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपनाकर प्रेरणादायी जीवन जीने तथा देश की एकता, अखंडता और समग्र विकास के लिए योगदान देने का आह्वान किया।
युवा ही भविष्य के भारत की मजबूत नींव
तेलंगाना मेधावी फोरम के अध्यक्ष डॉ. राज नारायण मुदिराज ने युवाओं से भ्रष्टाचार, अराजकता, अवैध गतिविधियों और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष करने की अपील की। प्रख्यात पर्यावरणविद् एवं शिक्षाविद् डॉ. लायन कोमटिरेड्डी गोपाल रेड्डी ने कहा कि युवा ही भविष्य के भारत की मजबूत नींव हैं। इस अवसर पर बताया गया कि एन. रामचंद्रराव ने पिछले 45 वर्षों से छात्र और युवा संगठनों में निरंतर सेवा की है। एक वरिष्ठ उच्च न्यायालय अधिवक्ता के रूप में उन्होंने हजारों लोगों को कानून और न्याय के प्रति जागरूक किया। भारतीय जनता पार्टी में चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ते हुए वे विधान परिषद सदस्य बने और वर्तमान में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में उल्लेखनीय सेवाएं दे रहे हैं।
स्वामी विवेकानंद एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मान
इन विशिष्ट सेवाओं को मान्यता देते हुए तेलंगाना राज्य से वर्ष 2026 के लिए दिए जाने वाले एकमात्र स्वामी विवेकानंद एक्सीलेंस अवॉर्ड से उन्हें सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार डॉ. राज नारायण मुदिराज के साथ-साथ फोरम के सचिव प्रोफेसर मोहम्मद अख्तर अली, उस्मानिया विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. रवितेजा चौहान, शिक्षाविदों तथा टीआईएफ समन्वयक जी. वेणुगोपाल एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा पुष्पमाला, शॉल और स्मृति-चिह्न भेंट कर भव्य रूप से प्रदान किया गया।
स्वामी विवेकानंद की 4 शिक्षाएं क्या हैं?
युवाओं में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को सबसे बड़ी शक्ति माना गया। कर्मयोग के माध्यम से निस्वार्थ सेवा और कर्तव्य पालन पर जोर दिया गया। सभी धर्मों की समानता और आपसी सम्मान का संदेश दिया गया। शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और आत्मविकास का साधन बताया गया। इन शिक्षाओं ने भारतीय युवाओं को नई दिशा दी।
स्वामी विवेकानंद कौन थे और वह क्यों प्रसिद्ध हैं?
उन्नीसवीं सदी के महान संत, विचारक और दार्शनिक के रूप में उन्हें जाना जाता है। शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में दिए गए उनके भाषण ने भारत की आध्यात्मिक विरासत को विश्व मंच पर प्रतिष्ठा दिलाई। उन्होंने वेदांत और योग दर्शन को सरल रूप में जन-जन तक पहुंचाया। उनके विचार आज भी युवाओं को प्रेरित करते हैं।
विवेकानंद के प्रमुख कार्य कौन से थे?
रामकृष्ण मिशन की स्थापना उनके प्रमुख कार्यों में शामिल है। समाज सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक जागरण के लिए अनेक संस्थाएं शुरू की गईं। भारतीय संस्कृति और वेदांत दर्शन का प्रचार देश और विदेश में किया गया। युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करना उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।
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