चंदा लगाकर बना डाली 4 किमी लंबी सड़क
मुलुगु । अधिकारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के कथित लापरवाह रवैये से तंग आकर पंचायत राज और ग्रामीण विकास मंत्री सीथक्का (Development Minister Seethakka) के पैतृक जिले मुलुगु के एक आदिवासी गांव के निवासियों ने स्वयं सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। वेंकटपुरम मंडल के अलुबाका ग्राम पंचायत के अंतर्गत मुथारम गांव (Mutharam Village) के निवासियों ने अपने गांव को लगभग चार किलोमीटर दूर स्थित राजमार्ग से जोड़ने के लिए मिट्टी की सड़क बिछाने और पुलिया बनाने के लिए धन का योगदान दिया है। भद्राचलम विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मुथारम और सीतारामपुरम गांवों की ओर जाने वाली सड़क पर पत्थर भरे हुए थे और उस पर चलना मुश्किल हो गया था।
सड़क बनाने के लिए किया श्रमदान
गांव में करीब 150 परिवार रहते हैं, जिनमें से प्रत्येक परिवार ने सड़क निर्माण के लिए मजदूरी के रूप में अपनी मामूली कमाई से 2,000 रुपये का योगदान दिया। चूंकि सड़क पैदल चलने या दोपहिया वाहनों के लिए भी उपयुक्त नहीं रह गई थी, इसलिए ग्रामीणों ने स्वेच्छा से निर्माण कार्य करने का फैसला किया। उन्होंने ट्रैक्टर और अन्य निर्माण उपकरण किराए पर लिए और सड़क बनाने के लिए श्रमदान किया।

एक ग्रामीण, थाती रामबाबू ने कहा कि आईटीडीए अधिकारियों और विधायकों को कई याचिकाएं प्रस्तुत करने के बावजूद, पिछले चालीस वर्षों से समस्या का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हाल ही में भद्राचलम के विधायक डॉ. तेलम वेंकट राव को एक और याचिका सौंपी थी, लेकिन इसका भी कोई नतीजा नहीं निकला।
नेता गांव तक सड़क बनाने का करते हैं झूठा वादा
उन्होंने दुख जताते हुए कहा, ‘हर चुनाव में नेता हमारे गांव तक मार्ग बनाने का वादा करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद अपने वादे भूल जाते हैं।’ गांव की एक महिला रेवती ने बताया कि अगर कोई बीमार पड़ जाए तो उसे अस्पताल पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता है क्योंकि पत्थर से भरी मार्ग से एंबुलेंस नहीं गुजर सकती। उन्होंने बताया, ‘गर्भवती महिलाओं को चारपाई से बनी डोली में ले जाया जाता है।’ ग्रामीणों ने अधिकारियों और मंत्री सीताक्का से अपील की है कि वे उनकी लंबे समय से लंबित शिकायत का समाधान करें और मौजूदा मिट्टी की मार्ग के स्थान पर एक उचित बी.टी. मार्ग का निर्माण कार्य शुरू करें।
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