IRAN- ईरान-इजरायल तनाव पर 12 देशों की चिंता, युद्ध रोकने की मांग

By Anuj Kumar | Updated: March 20, 2026 • 11:45 AM

रियाद। इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव अब पूरे मिडिल ईस्ट (Middile East) में फैलता नजर आ रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई देशों का माहौल भी बारूद और धुएं से प्रभावित हो रहा है। इसी बीच 12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से हमले तुरंत रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की अपील की है।

रियाद बैठक में लिया गया बड़ा फैसला

रियाद में आयोजित संयुक्त बैठक में सऊदी अरब समेत कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के बाद जारी बयान में सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान (Lebnan) पाकिस्तान, सीरिया, तुर्किए, बहरीन और अजरबैजान के विदेश मंत्रियों ने एकजुट होकर ईरान की सैन्य कार्रवाई की निंदा की।

नागरिक ठिकानों पर हमलों का आरोप

विदेश मंत्रियों ने आरोप लगाया कि ईरान ने हाल के हमलों में रिहायशी इलाकों और नागरिक ढांचे को निशाना बनाया। इनमें तेल और गैस प्लांट (Gas Plant) एयरपोर्ट, डीसेलिनेशन प्लांट, रेजिडेंशियल बिल्डिंग और राजनयिक ठिकाने शामिल हैं। उनका कहना है कि ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा पैदा करते हैं।

ऊर्जा ठिकानों पर हमलों से बढ़ी चिंता

यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया। ईरान के हमलों से कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में आग लगने की खबरें सामने आई हैं, जबकि सऊदी अरब में बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया।

संबंधों पर भी दी चेतावनी

संयुक्त बयान में विदेश मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ईरान के साथ संबंध इस बात पर निर्भर करेंगे कि वह अन्य देशों की संप्रभुता का कितना सम्मान करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप या सैन्य दबाव स्वीकार्य नहीं होगा।

इजरायल के हमलों की भी आलोचना

मंत्रियों ने लेबनान पर इजरायली हमलों की भी निंदा की और क्षेत्र की सुरक्षा, स्थिरता और अखंडता बनाए रखने पर जोर दिया। यानी इस बयान में दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की गई है।

कतर की सख्त कार्रवाई

दूसरी ओर, कतर ने अपने यहां हुए हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कतर ने रास लाफान क्षेत्र को निशाना बनाए जाने को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया। इसके बाद कतर सरकार ने ईरानी दूतावास के कुछ अधिकारियों को “पर्सोना नॉन ग्राटा” घोषित करते हुए 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया।

क्षेत्रीय शांति पर मंडरा रहा खतरा

कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह शुरू से ही इस संघर्ष से दूर रहने की नीति पर चल रहा था, लेकिन इसके बावजूद उसे निशाना बनाया गया। मंत्रालय के अनुसार, इस तरह की घटनाएं क्षेत्रीय शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।

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वैश्विक असर की आशंका

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि मिडिल ईस्ट में तनाव तेजी से बढ़ रहा है। ऊर्जा ठिकानों पर हमलों से न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर तेल और गैस आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है।

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