नई दिल्ली। भारतीय रेलवे यात्रियों को स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। आईआरसीटीसी ने वंदे भारत (Vande Bharat) बेंगलुरु राजधानी और शताब्दी ट्रेनों (Shtabadi train) के लिए एक नई पहल शुरू की है।
प्लास्टिक प्लेट की जगह बायोडिग्रेडेबल थाली
अब इन ट्रेनों में यात्रियों को प्लास्टिक प्लेट की जगह बायोडिग्रेडेबल थाली (Biodegradable Thali) में भोजन परोसा जाएगा। इस बदलाव से हर महीने 50 हजार से अधिक थालियों में करीब 300 किलोग्राम प्लास्टिक की बचत होगी।
प्लास्टिक मुक्त रेलवे की दिशा में कदम
आईआरसीटीसी लंबे समय से ट्रेनों और रेलवे परिसरों को प्लास्टिक मुक्त बनाने पर काम कर रही है। इसी कड़ी में अब ट्रेनों में प्लास्टिक प्लेट में खाना परोसना बंद करने का फैसला लिया गया है।
मार्च से लागू होगी नई व्यवस्था
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक मार्च महीने से वंदे भारत, शताब्दी और बेंगलुरु राजधानी एक्सप्रेस में बायोडिग्रेडेबल थाली में भोजन परोसा जाएगा। सफल होने के बाद इसे अन्य प्रीमियम और लंबी दूरी की ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा।
कैसी होती है बायोडिग्रेडेबल थाली
बायोडिग्रेडेबल थाली सब्जियों और फलों के छिलकों, कागज और अन्य प्राकृतिक तत्वों से तैयार की जाती है। इस्तेमाल के बाद ये थालियां तीन से छह महीने में खुद ही गल-सड़कर मिट्टी में मिल जाती हैं।
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पर्यावरण के लिए बड़ी राहत
जहां प्लास्टिक प्लेट को नष्ट होने में 400 से 500 साल लगते हैं, वहीं बायोडिग्रेडेबल थाली कुछ महीनों में ही नष्ट हो जाती है। इसके इस्तेमाल से पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा।
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