नई दिल्ली । अमेरिकी सेना (America Army) की हिंद-प्रशांत कमान के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पपारो ने भारत–अमेरिका के बढ़ते रक्षा संबंधों को वैश्विक स्थिरता के लिए बेहद अहम बताया है। नई दिल्ली यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि दोनों देशों की रक्षा साझेदारी का एकमात्र साझा उद्देश्य “ताकत के बल पर शांति” बनाए रखना है।
ताकत के जरिए शांति ही साझा लक्ष्य
पत्रकारों से बातचीत में एडमिरल पपारो (Admiral Paparo) ने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका लोकतांत्रिक मूल्यों वाले देश हैं और उनके हित समान हैं। दोनों देशों की सैन्य साझेदारी किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक शांति सुनिश्चित करने के लिए है।
हिंद-प्रशांत में बढ़ती आक्रामकता पर चिंता
एडमिरल पपारो ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती जबरन कार्रवाई और आक्रामक रुख पर चिंता जताई। उन्होंने इशारों-इशारों में चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि यह क्षेत्र वैश्विक संतुलन के लिए बेहद संवेदनशील हो चुका है।
समुद्री सहयोग को नई ऊंचाई देने की तैयारी
उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका समुद्री क्षेत्र में सैन्य सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह साझेदारी सिर्फ द्विपक्षीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिरोधक क्षमता (Diterence) को मजबूत करती है।
हिंद-प्रशांत का वैश्विक महत्व
एडमिरल पपारो के मुताबिक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दुनिया की 60 फीसदी आबादी रहती है और वैश्विक जीडीपी का भी बड़ा हिस्सा यहीं से आता है। साथ ही दुनिया की दस सबसे बड़ी सेनाओं में से सात इसी क्षेत्र में सक्रिय हैं, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।
भारतीय सेना के संयम की सराहना
ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारतीय सेना की सूझबूझ और अनुशासन की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि जटिल हालात में भी भारतीय सेना का संयम प्रशंसनीय है।
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मजबूत डिटरेंट पोस्चर की जरूरत
पाकिस्तान द्वारा चीनी हथियारों के उपयोग से जुड़े सवाल पर एडमिरल पपारो ने कूटनीतिक जवाब देते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में सतर्कता और मजबूत प्रतिरोधक क्षमता समय की मांग है।कुल मिलाकर, एडमिरल पपारो का बयान भारत–अमेरिका रक्षा साझेदारी के उस नए चरण की ओर संकेत करता है, जहां सहयोग केवल रणनीति नहीं बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली ताकत बनता जा रहा है।
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