Technology: अब अंधेरे में भी करें WhatsApp वीडियो कॉल और फोटोग्राफी

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फोटोग्राफी
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WhatsApp ला रहा है नाइट मोड

WhatsApp लगातार अपने फीचर्स को बेहतर बनाने में जुटा हुआ है। इस बार कंपनी ने कैमरा सेक्शन में एक ऐसा फीचर लाने की तैयारी की है जो रात में भी शानदार तस्वीरें और वीडियो कॉल की सुविधा देगा। इस नए फीचर को “नाइट मोड” कहा जा रहा है और यह लो-लाइट फोटोग्राफी को नया अनुभव देने वाला है। चलिए जानते हैं इस फीचर की खास बातें, कैसे करता है काम और कौन कर सकेगा इसका इस्तेमाल

अब अंधेरे में भी होगी तस्वीरें और वीडियो कॉलिंग

WhatsApp का नया नाइट मोड फीचर खासतौर पर उन यूजर्स के लिए है जो कम रोशनी में फोटो या वीडियो कॉल करना पसंद करते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फीचर WhatsApp के एंड्रॉयड वर्जन में आ रहा है, जिससे कम रोशनी में ली गई तस्वीरें ज्यादा साफ और डिटेलिंग के साथ नजर आएंगी। WABetaInfo की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह नया विकल्प फिलहाल WhatsApp Beta for Android v2.25.22.2 वर्जन में दिखाई दिया है, जिसे बीटा यूजर्स के लिए जारी किया गया है। इसमें कैमरा इंटरफेस के टॉप राइट कॉर्नर में एक चंद्रमा (moon) आइकन जोड़ा गया है, जिसे टैप करके यूजर नाइट मोड को ऑन या ऑफ कर सकता है।

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कैसे करता है काम नाइट मोड?

WhatsApp का नाइट मोड कोई हार्डवेयर आधारित नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर बेस्ड सुधार है। इसका मतलब है कि यह स्मार्ट एल्गोरिद्म के जरिए कम रोशनी वाली जगहों पर ली गई तस्वीरों की एक्सपोजर (exposure) और नॉइज (noise) को बेहतर बनाता है। जब यह मोड ऑन किया जाता है तो तस्वीरों में शैडोज यानी परछाइयों में मौजूद डिटेल्स को उभारता है। इससे बिना किसी एक्सटर्नल फ्लैश या लाइट के भी अच्छी क्वालिटी की फोटो क्लिक की जा सकती है। यह फीचर उन यूजर्स के लिए काफी उपयोगी होगा जो घर के अंदर या रात में फोटो खींचना पसंद करते हैं।

ऑटोमैटिक नहीं, मैन्युअल मोड

ध्यान देने वाली बात यह है कि यह मोड ऑटोमैटिक नहीं है। यानी अगर आप चाहते हैं कि आपकी तस्वीरें नाइट मोड में ली जाएं, तो आपको कैमरा ओपन करने के बाद मैन्युअली इस चंद्रमा आइकन पर टैप कर इसे ऑन करना होगा। यह उन यूजर्स के लिए थोड़ा असुविधाजनक हो सकता है जो चाहते हैं कि फोन खुद ही परिस्थिति के अनुसार मोड चुन ले। फिर भी, मैन्युअल मोड होने के कारण यूजर को पूरी नियंत्रण की सुविधा मिलती है।

WhatsApp कैमरा हो रहा और स्मार्ट

WhatsApp का यह नया नाइट मोड फीचर यूजर्स को कम रोशनी में बेहतर फोटोग्राफी और वीडियो कॉलिंग का अनुभव देगा। हालांकि इसमें अभी थोड़ी सीमाएं हैं, लेकिन फिर भी यह फीचर दिन प्रतिदिन बेहतर होता जा रहा है। आने वाले समय में WhatsApp इसे और ज्यादा एडवांस बना सकता है, जिससे यूजर्स को और भी बेहतरीन विजुअल अनुभव मिलेगा। अगर आप WhatsApp के बीटा टेस्टर हैं, तो इस फीचर को जरूर आजमाएं, और नहीं हैं तो थोड़ा इंतजार करें, जल्द ही यह सभी के लिए उपलब्ध हो सकता है।

किसे मिलेगा यह फीचर?

फिलहाल यह फीचर सिर्फ Google Play Beta Program के तहत चुनिंदा बीटा टेस्टर्स के लिए उपलब्ध कराया गया है। लेकिन उम्मीद है कि कंपनी इसे अगले कुछ हफ्तों में आम यूजर्स के लिए भी रोलआउट कर सकती है। हालांकि इस फीचर के कुछ सीमाएं भी हैं। उदाहरण के तौर पर यह मोड बेहद अंधेरे में तस्वीरों को बहुत ज्यादा ब्राइट नहीं कर सकता। यह केवल मामूली सुधार कर पाता है और किसी प्रोफेशनल कैमरा सेटअप या अत्यधिक एडवांस लो-लाइट टेक्नोलॉजी का विकल्प नहीं है।

वीडियो कॉलिंग के अनुभव में भी होगा सुधार

भविष्य में इस नाइट मोड का उपयोग न केवल तस्वीरों के लिए बल्कि वीडियो कॉलिंग में भी किया जा सकेगा। यानी यदि आप रात में बिना पर्याप्त रोशनी के किसी से वीडियो कॉल करते हैं तो यह फीचर आपके चेहरे को बेहतर रोशनी और स्पष्टता के साथ सामने लाएगा। यह उन यूजर्स के लिए बेहतरीन अनुभव होगा जो देर रात कॉल करते हैं या कम रोशनी वाले स्थानों में रहते हैं।

हेमंत सोरेन का धर्म क्या है?

इनका जन्म झारखंड के एक आदिवासी परिवार में हुआ और ये सरना धर्म से जुड़े माने जाते हैं, जो प्रकृति पूजक परंपरा है। हालांकि सरकारी दस्तावेज़ों में कई बार इन्हें हिंदू धर्म के अंतर्गत भी वर्गीकृत किया गया है, परंतु इनकी संस्कृति आदिवासी पहचान के साथ जुड़ी है।

कल्पना सोरेन का घर कहाँ है?

हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन मूलतः ओडिशा राज्य के मयूरभंज जिले से हैं। विवाह के बाद वे झारखंड की राजधानी रांची में अपने परिवार के साथ रहती हैं और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं, खासकर शिक्षा और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी पहलों में।

हेमंत सोरेन से पहले झारखंड का मुख्यमंत्री कौन था?

हेमंत सोरेन से ठीक पहले झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास थे, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से थे। उन्होंने 2014 से 2019 तक मुख्यमंत्री पद संभाला और वे राज्य के पहले गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री भी बने थे।

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