वेंकटस्वामी को मंत्री बनाए जाने से मंचेरियल विधायक नाखुश
हैदराबाद। कांग्रेस सरकार द्वारा तीन मंत्रियों को तीन पूर्ववर्ती जिलों के प्रभारी मंत्री के रूप में पदोन्नत करने के एक दिन बाद, पार्टी नेताओं ने चिंता व्यक्त की कि इस कदम से मंत्रिमंडल के भीतर मौजूदा मतभेद और गहरा सकते हैं। खान एवं भूविज्ञान मंत्री जी विवेक वेंकटस्वामी को पूर्ववर्ती मेदक जिले का प्रभारी मंत्री नियुक्त किया गया है। उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने से मंचेरियल विधायक प्रेम सागर राव खुश नहीं हैं, जो मंत्रिमंडल में जगह पाने के इच्छुक थे।
हो सकता है दीर्घकालिक असर
प्रेम सागर राव को कथित तौर पर कई मंत्रियों का समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए जोरदार पैरवी की थी। हालांकि, राज्य नेतृत्व ने इस समूह की इच्छा के विरुद्ध जाकर चेन्नूर के विधायक विवेक वेंकटस्वामी को शामिल करने का फैसला किया। गांधी भवन के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘इसका दीर्घकालिक असर हो सकता है, खासकर पार्टी के एससी विंग के भीतर। उद्योगपति होने के अलावा, खान मंत्री के एआईसीसी के साथ मजबूत संबंध हैं। ये कारक अंततः कुछ वरिष्ठ एससी नेताओं के साथ टकराव पैदा कर सकते हैं।’
श्रीहरि को कैबिनेट में जगह देने का किया था वादा
पशुपालन मंत्री टी. श्रीहरि को खम्मम का प्रभारी मंत्री बनाए जाने को जहां कुछ लोगों ने सामाजिक न्याय की दिशा में उठाया गया कदम बताया है, वहीं अन्य इसे असंतुष्ट पिछड़ा वर्ग नेताओं के प्रभाव को कम करने के लिए एक रणनीतिक कदम के रूप में देख रहे हैं। स्मरणीय है कि विधानसभा और संसदीय चुनावों के दौरान मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मुदिराज समुदाय के नेता और एआईसीसी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे के करीबी सहयोगी श्रीहरि को कैबिनेट में जगह देने का वादा किया था।

मेदक की प्रभारी मंत्री रह चुकी हैं कोंडा सुरेखा
वन मंत्री कोंडा सुरेखा पहले मेदक की प्रभारी मंत्री के रूप में कार्य कर चुकी हैं, यह पद अब विवेक वेंकटस्वामी के पास है। इसके अतिरिक्त, पार्टी नेता सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी और सड़क एवं भवन मंत्री कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी जैसे वरिष्ठ नेताओं को प्रभारी भूमिकाओं से बाहर रखे जाने से असहज हैं, क्योंकि उन्हें उच्च जाति समुदायों में असंतोष का डर है। बोधन विधायक सुदर्शन रेड्डी को कैबिनेट में जगह नहीं मिलने के बाद ये चिंताएं और बढ़ गई हैं। उनके समर्थकों ने मांग की है कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले उन्हें कैबिनेट में शामिल किया जाए। इसी तरह, मुनुगोड़े के विधायक कोमाटिरेड्डी राजगोपाल रेड्डी और इब्राहिमपटनम के विधायक मालरेड्डी रंगारेड्डी, दोनों को ही कैबिनेट में जगह मिलने की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें भी निराशा हाथ लगी है।