नई दिल्ली । भारतीयों की अपनी ट्रेन वंदेभारत (Vande Bharat) लोगों को काफी पसंद आ रही है। यही वजह है कि चारों तरफ से इसकी मांग बढ़ रही है। इस मांग के चलते रेलवे ने हर तरफ वंदेभारत एक्सप्रेस चलाने का अपना प्लान तैयार किया है।
100 फीसदी से अधिक ऑक्यूपेंसी रेट से चल रही ट्रेनें
कई रूटों पर चलने वाली यह ट्रेन 100 फीसदी आक्यूपेंसी रेट से भी अधिक चल रही है। इस शाही ट्रेन (Sahi Train) के प्रति लोगों के बढ़ते रुझान को देखते हुए भारतीय रेलवे ने बड़ा प्लान तैयार किया है, जिससे देश के तमाम उन शहरों के लोग भी इस ट्रेन से सफर कर सकें, जहां पर अभी इसका ऑपरेशन शुरू नहीं हुआ है।
छोटे शहरों और पर्यटन स्थलों तक पहुंचेगी वंदेभारत
रेलवे अब बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों को भी वंदेभारत से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इससे देश के अधिक से अधिक लोग इस ट्रेन से सफर करने का अनुभव ले सकेंगे।
90 नई वंदेभारत ट्रेनें होंगी तैयार
भारतीय रेलवे के अनुसार, वंदेभारत की सर्विस और बढ़ाने के लिए 90 नई वंदेभारत ट्रेनें तैयार कराई जा रही हैं। इनका ऑर्डर हो चुका है और कई कोच फैक्ट्रियों में निर्माण कार्य चल रहा है। इतनी बड़ी संख्या का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जितनी वंदेभारत एक्सप्रेस का निर्माण पिछले करीब 7 सालों में नहीं हुआ, उससे अधिक का निर्माण अब होने जा रहा है।
24 राज्यों के 100 से अधिक शहरों को कर रही कनेक्ट
फिलहाल कुल 83 वंदेभारत ट्रेनें तैयार हो चुकी हैं, जो 24 राज्यों के 100 से अधिक शहरों को कनेक्ट कर रही हैं। इनमें प्रमुख रूप से उत्तर प्रदेश, दिल्ली, (Delhi) बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, असम, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, गोवा और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं।
जल्द शुरू होगी स्लीपर वंदेभारत
सिटिंग वंदेभारत के साथ-साथ भारतीय रेल जल्द ही स्लीपर वंदेभारत शुरू करने जा रहा है। संभावना है कि अगले महीने के अंत तक यह ट्रेन ट्रैक पर आ जाएगी। एक ट्रेन बनकर तैयार है और दूसरी लगभग तैयार होने वाली है। दोनों ट्रेनों के आने के बाद ही नियमित सर्विस शुरू होगी, क्योंकि यह लंबी दूरी की ओवरनाइट ट्रेन होगी।
वंदे भारत ट्रेनों का मालिक कौन है?
इसका सीधा जवाब है—वंदे भारत ट्रेनों का मालिक वास्तव में भारतीय रेलवे ही है। ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत, इन ट्रेनों का निर्माण चेन्नई और देश के अन्य हिस्सों में स्थित कारखानों में किया जाता है।
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