दवाई उद्योग पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव
नई दिल्ली: अमेरिका(USA) ने भारत(India) की दवा निर्यात(Pharma) उद्योग को फेंटानिल प्रीकर्सर सप्लाई के संदिग्ध स्रोत के रूप में नामित किया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आरोप है कि भारत से स्पलाइ की गई बेनामी दवाएं और प्रीकर्सर कई देशों में पहुंचकर अवैध ओपिओइड उत्पादन में इस्तेमाल हो चुकी हैं। इस कदम से भारतीय दवा कंपनियों और सरकारी नियामकों पर नियामकीय और व्यापारिक दबाव बढ़ा है।
इस बीच सरकार ने संज्ञान लिया है कि भारत की ‘दुनिया की फ़ार्मेसी’ की छवि प्रभावित हो सकती है। निर्यातकों को टैरिफ और वीजा प्रतिबंध का सामना करना पड़ रहा है। कई देशों ने भारत से दवाओं के आयात पर पुनः विचार शुरू कर दिया है।
आरोप और भारत की प्रतिक्रिया
अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत चीन के बाद विश्व स्तर पर फेंटानिल प्रीकर्सर का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। भारत की रासायनिक निर्यात क्षमता को देखते हुए यह आरोप चिंता का विषय बन गया। रिपोर्ट में मंगलूरु, हैदराबाद जैसी दवा हब्स का उल्लेख किया गया।
सरकार ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और कहा कि भारत अवैध ड्रग तस्करी के खिलाफ पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उसने फेंटानिल जैसे नशीले पदार्थों की सप्लाई चेन की निगरानी तेज कर दी है। साथ ही कहा गया है कि दवाओं और प्रीकर्सर के निर्यात पर कड़े ऐतिहासिक कानूनी नियम लागू हैं।
ऑडिट, निर्यात नियंत्रण और वैश्विक दबाव
अमेरिका द्वारा दवाओं पर टैरिफ और वीजा प्रतिबंध लगाने से इंडियन निर्यातकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने नई रिपोर्ट में उन कंपनियों और व्यक्तियों के नाम शामिल किए हैं जो फेंटानिल सप्लाई से जुड़े बताए गए हैं। इसलिए आयातक देशों ने भारतीय दवाओं की गुणवत्ता और ट्रैक रिकॉर्ड की समीक्षा शुरू कर दी है।
इस कदम से भारत के ऑडिट और मानक नियंत्रण तंत्र पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई देशों ने कहा है कि वे भारत से दवाएं आयात करने से पहले अतिरिक्त प्रमाण या आयात परबन्ध मांग सकते हैं। परिणामस्वरूप भारत के दवा निर्यात में गिरावट की आशंका है।
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चुनौतियाँ और भविष्य की राह
फेंटानिल की सप्लाई चेन में भारत की भूमिका को लेकर संशय ने वैश्विक दवा व्यापार की तस्वीर बदल दी है। निर्यातकों को अब अतिरिक्त निरीक्षण, प्रमाणीकरण और लागतों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए फार्मा उद्योग को आत्मनिरीक्षण, गुणवत्ता प्रमाणन और अंतरराष्ट्रीय मानकों की सख्ती से पूर्ति करनी होगी।
यह समय है जब भारत की वैध दवा निर्यात नीति, पारदर्शिता और नियामकीय नियंत्रणों को मजबूत करने की आवश्यकता है। तभी ही देश की ‘फ़ार्मेसी ऑफ़ द वर्ल्ड’ की छवि बचाई जा सकेगी।
इस आरोप से भारतीय दवा उद्योग को सबसे बड़ा खतरा क्या है
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की दवाओं की मांग और वैश्विक भरोसा गिरने का खतरा है। निर्यातकों को ऑडिट व प्रमाणीकरण के अतिरिक्त खर्च व देरी का सामना करना पड़ सकता है।
भारत को इस चुनौती से बचने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए
उद्योग को नियामकीय मानक सख्ती से लागू करने चाहिए, निर्यात चेन को पारदर्शी बनाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय सहमति व नियंत्रणों का पालन करना चाहिए। साथ ही प्रमाणीकरण प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रक प्रणाली को आधुनिक व मजबूत बनाना होगा।
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