पटना। बिहार के लोगों के लिए एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है। राज्य में पहली बार तिरूपति बालाजी (Tirupati Bala ji) की तर्ज पर एक भव्य और दिव्य मंदिर का निर्माण होने जा रहा है। यह मंदिर पटना जिले के मोकामा में आकार लेगा और इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया को राज्य सरकार ने निर्णायक गति प्रदान कर दी है। सरकार ने मोकामा खास स्थित 10.11 एकड़ जमीन पर्यटन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित कर दी है।
मोकामा का धार्मिक और भौगोलिक महत्व
मोकामा का चयन इस मंदिर के लिए कई दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह शहर गंगा नदी (Ganga River) के किनारे स्थित है और अंग, मगध तथा मिथिला—इन तीन प्राचीन जनपदों के संगम का प्रतीकात्मक स्थल भी है। मोकामा के ठीक सामने सिमरिया घाट पर लगने वाला प्रसिद्ध अर्ध कुंभ मेला इसे धार्मिक दृष्टि से और भी विशिष्ट बनाता है। दिल्ली–हावड़ा मेन लाइन (Delhi Howrah Main Line) सहित उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली प्रमुख रेलवे लाइन यहां से होकर गुजरती है। सड़क संपर्क भी बेहद सुगम है, क्योंकि यह क्षेत्र कई राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
टीटीडी के सहयोग से होगा निर्माण
मंदिर निर्माण का कार्य अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त तिरूमला तिरुपति देवस्थानम् (टीटीडी) के सहयोग से होने जा रहा है। आंध्र प्रदेश के तिरुपति में स्थित यह संस्थान दुनिया भर में प्रसिद्ध है और अनेक पवित्र देवस्थानों का प्रबंधन करता है। टीटीडी सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में भी विशेष योगदान देता है।
देश के कई राज्यों में यह वेद पाठशाला, वैदिक विश्वविद्यालय, धर्मशाला, अस्पताल और निर्धन, वृद्ध व रोगग्रस्त लोगों के लिए आश्रय स्थलों का संचालन करता है। दिव्यांगों और गंभीर हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के लिए विशेष चिकित्सा सुविधा प्रदान करना भी इसके प्रमुख कार्यों में शामिल है।
धार्मिक पर्यटन और स्थानीय विकास में बढ़ावा
बिहार में इस संस्थान के आगमन से धार्मिक पर्यटन को नया आयाम मिलेगा और स्थानीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। बिहार सरकार ने टीटीडी के साथ एमओयू साइन करने का प्रस्ताव भेज दिया है। टीटीडी के अध्यक्ष बी.आर. नायडू ने बिहार सरकार के इस फैसले की प्रशंसा करते हुए इसे ऐतिहासिक कदम बताया।
उन्होंने कहा कि मोकामा में टीटीडी मंदिर निर्माण के लिए 99 साल की अवधि के लिए मात्र 1 रुपये के टोकन लीज पर जमीन उपलब्ध कराना बिहार की उदारता और दूरदर्शिता को दर्शाता है।
मोकामा बनेगा प्रमुख पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र
भव्य परियोजना के पूरा होने पर न सिर्फ बिहार के धार्मिक महत्व में वृद्धि होगी, बल्कि मोकामा एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में भी उभरकर सामने आएगा। राज्य में आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की यह दिशा लंबे समय तक याद की जाएगी।
तिरुपति बालाजी मंदिर का इतिहास क्या है?
तिरुपति का इतिहास कई सदियों पुराना है, जो भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर के इर्द-गिर्द घूमता है। शुरुआत में ‘त्रिवेंगदम’ के नाम से जाने जाने वाले इस मंदिर का निर्माण लगभग तीसरी शताब्दी में हुआ था और पांचवीं शताब्दी तक यह एक प्रमुख धार्मिक केंद्र बन गया था। ऐतिहासिक रूप से, पहाड़ियों पर स्थित होने के कारण यह आक्रमणों से बचा रहा, जिससे यह मैदानी इलाकों के मंदिरों की मूर्तियों को सुरक्षित रखने के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान बन गया।
तिरुपति बालाजी की आंखें क्यों ढकी हुई हैं?
तिरुपति बालाजी की आँखें उनकी अत्यधिक शक्तिशाली और त्रिकालदर्शी दृष्टि के कारण ढकी रहती हैं, क्योंकि माना जाता है कि उनकी सीधी दृष्टि से भक्त अभिभूत हो सकते हैं, उनके पाप भस्म हो सकते हैं, या इससे ब्रह्मांडीय संतुलन बिगड़ सकता है;
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