स्वास्थ्य से शिक्षा तक तकनीकी विस्तार
नई दिल्ली: भारत(India) को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने के लिए गूगल(Google) ने बड़े निवेश की घोषणा की है। नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और सतत विकास जैसे अहम क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान विकसित किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य तकनीक को सीधे जनहित और सामाजिक जरूरतों से जोड़ना है।
यह घोषणाएं लैब टु इम्पैक्ट कार्यक्रम के दौरान सामने आईं, जो इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से जुड़ा था। इसमें IISc बेंगलुरु और IIT कानपुर(IIT Kanpur) समेत चार प्रमुख संस्थानों को एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने के लिए 80 लाख डॉलर की सहायता दी गई है। इन केंद्रों का फोकस शोध और व्यावहारिक अनुप्रयोग दोनों पर रहेगा।
शिक्षा और शोध को मिला मजबूत आधार
सरकार द्वारा बनाए गए चार एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को एक साझा राष्ट्रीय अनुसंधान मिशन की तरह काम करने के लिए तैयार किया गया है। इनका लक्ष्य आधारभूत रिसर्च, जिम्मेदार एआई और समाजोपयोगी तकनीकों को बढ़ावा देना है। यह पहल विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक लक्ष्य से भी जुड़ी मानी जा रही है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इस मौके पर कहा कि भारत एआई को केवल तकनीक नहीं, बल्कि सामरिक राष्ट्रीय क्षमता के रूप में देख रहा है। गूगल डीपमाइंड के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने भी माना कि भारत में बड़े पैमाने पर एआई अपनाने की क्षमता है, जो वैश्विक स्तर पर बदलाव ला सकती है।
स्वास्थ्य और कृषि में एआई समाधान
स्वास्थ्य सेवा और कृषि क्षेत्र के लिए Wadhwani AI को 45 लाख डॉलर की फंडिंग दी गई है। इसके तहत हेल्थ वाणी और एग्रीवाणी जैसे प्लेटफॉर्म विकसित किए जाएंगे, जो जमीनी स्तर पर सेवाओं को बेहतर बनाएंगे। इसके अलावा, भाषाई विविधता को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी बॉम्बे में इंडिक लैंग्वेज टेक्नोलॉजीज रिसर्च हब स्थापित किया जा रहा है।
भारत के हेल्थ फाउंडेशन मॉडल के लिए भी विशेष एआई सिस्टम तैयार किए जाएंगे। एम्स विशेषज्ञों के साथ मिलकर त्वचा रोग और ओपीडी ट्रायजिंग के लिए भारत-विशिष्ट मॉडल बनाए जा रहे हैं। लाखों मेडिकल रिकॉर्ड्स को अंतरराष्ट्रीय मानकों में बदलने पर भी काम चल रहा है।
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स्टार्टअप्स और डिजिटल स्वास्थ्य को बढ़ावा
गूगल(Google) ने कई भारतीय एआई स्टार्टअप्स और रिसर्च प्रोजेक्ट्स को छोटे अनुदान भी दिए हैं, ताकि नवाचार को गति मिल सके। यह सहयोग शोध से लेकर वास्तविक उपयोग तक की दूरी को कम करने में मदद करेगा।
हालांकि सबसे बड़ा असर डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर देखने को मिलेगा। देशभर के चार लाख से अधिक पंजीकृत स्वास्थ्य केंद्रों को गूगल मैप्स और सर्च पर अपडेट किया जा रहा है, जिससे आम लोगों को सही जानकारी आसानी से मिल सके।
यह निवेश भारत के लिए क्यों अहम माना जा रहा है
एआई निवेश से स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसी बुनियादी सेवाएं अधिक प्रभावी बनेंगी। शोध और स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी। इससे भारत तकनीकी नवाचार का केंद्र बन सकता है।
आम लोगों को इससे क्या प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा
डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ होंगी और जानकारी तक पहुंच आसान बनेगी। शिक्षा और भाषा तकनीक में सुधार से समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा। किसानों और मरीजों को बेहतर समाधान मिल सकेंगे।
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