नए साल से बदलेगा सफर का तरीका
नई दिल्ली: नई दिल्ली में टैक्सी(Taxi) यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव आने वाला है। 1 जनवरी 2026 से भारत(India) में सहकारी मॉडल पर आधारित भारत टैक्सी ऐप लॉन्च किया जा रहा है, जो ओला और उबर को सीधी टक्कर देगा। इस ऐप का उद्देश्य यात्रियों को पीक ऑवर में सामान्य किराया देना और ड्राइवरों को उनकी मेहनत का बड़ा हिस्सा दिलाना है। दावा है कि इससे रोजमर्रा के सफर में पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़ेंगे।
यह ऐप सहकार टैक्सी(Sahakar Taxi) को-ऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा संचालित किया जाएगा और इसका ट्रायल दिल्ली में पूरा हो चुका है। राजकोट(Rajkot) में भी इसकी टेस्टिंग चल रही है, जहां फरवरी से सेवा शुरू होने की तैयारी है। इस दौरान करीब 56 हजार ड्राइवरों ने पंजीकरण कराया है, जिससे इसके बड़े पैमाने पर विस्तार के संकेत मिलते हैं।
सहकारी मॉडल से यात्रियों को राहत
भारत टैक्सी(Taxi) ऐप का सबसे बड़ा दावा पीक आवर्स में किराये को नियंत्रित रखना है। अभी निजी ऐप्स में मांग बढ़ते ही किराया कई गुना हो जाता है, जिससे आम यात्रियों को परेशानी होती है। इस नए मॉडल में तय दरों के कारण अचानक बढ़ोतरी पर रोक लगेगी।
ऐप में कार, ऑटो और बाइक टैक्सी जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इससे छोटे सफर से लेकर लंबी दूरी तक यात्रियों को विकल्प मिलेंगे। वहीं किराये की स्पष्ट जानकारी पहले से मिलने के कारण सफर के दौरान किसी तरह का भ्रम नहीं रहेगा।
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ड्राइवरों की आमदनी में बड़ा बदलाव
इस मॉडल में ड्राइवर-ओन्ड कोऑपरेटिव सिस्टम अपनाया गया है, जिसमें ड्राइवर को किराये का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मिलेगा। निजी कंपनियों में यह हिस्सा लगभग 70 प्रतिशत तक सीमित रहता है, इसलिए यहां उनकी आय बढ़ने की संभावना है।
साथ ही ड्राइवरों को निजी प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और वे निर्णय प्रक्रिया में भी हिस्सेदार बनेंगे। हालांकि यात्रियों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है और दिल्ली पुलिस समेत अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर कई सेफ्टी फीचर्स जोड़े गए हैं।
यह नया ऐप यात्रियों के लिए कैसे फायदेमंद होगा
पीक आवर में भी सामान्य किराया लागू रहेगा। किराये में अचानक बढ़ोतरी नहीं होगी। अलग-अलग वाहन विकल्प मिलने से सफर आसान और सस्ता बनेगा।
चालकों को इस व्यवस्था से क्या मिलेगा
उन्हें किराये का बड़ा हिस्सा सीधे मिलेगा। आय स्थिर रहने की संभावना बढ़ेगी। निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी से काम का दबाव कम होगा।
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