बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य में विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को अधिक से अधिक अपनाना जरूरी है। गया जी में बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (Bipard) के मंथन 2025 समापन कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Confressing) के माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि इस मॉडल में सरकार कम निवेश करने के बावजूद विकास को तेज़ी से आगे बढ़ा सकती है।
जिला स्तर पर PPP को बढ़ावा
सम्राट चौधरी ने प्रमंडल आयुक्तों, जिला पदाधिकारियों और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जिला स्तर पर भी PPP मॉडल को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अगर जिलों से अच्छे प्रस्ताव मिलते हैं, तो सरकार उन्हें नीति बनाकर आगे बढ़ाएगी और अधिकारियों को खुले दिल से प्रोत्साहित किया जाएगा। इस मॉडल में सरकार सहयोगी भूमिका निभाती है, जैसे भूमि उपलब्ध कराना और न्यूनतम वित्तीय निवेश करना।
सड़क, बिजली और कचरा प्रबंधन में PPP मॉडल की सफलता
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि पूर्व में पथ निर्माण विभाग के हैम प्रोजेक्ट के स्वीकृति मिलने के बाद लगभग 17,000 करोड़ रुपये का निवेश राज्य में हुआ। वर्तमान में बिजली विभाग में भी PPP मॉडल के तहत अच्छा काम हो रहा है और दस हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में भी निजी इकाइयों की रुचि बढ़ी है।
सात निश्चय योजना और अन्य विकास परियोजनाएं
सम्राट चौधरी ने कहा कि सात निश्चय 01 और 02 की सफलता के बाद सात निश्चय 03 को भी मंजूरी दी गई है। पिछले 20 वर्षों में सड़क, बिजली, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम हुआ है। बिहार एक्सप्रेस वे, एयरपोर्ट, वाटरवे, रेल मेट्रो और वाटर मेट्रो जैसी परियोजनाओं के माध्यम से राज्य अब आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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