हैदराबाद। अल्पसंख्यक कल्याण एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री मोहम्मद अजहरुद्दीन (Mohammed Azharuddin) के राजनीतिक भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उन्हें 30 अप्रैल, 2026 तक राज्य विधानमंडल के किसी एक सदन की सदस्यता हासिल करनी होगी, अन्यथा उन्हें मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ेगा। अजहरुद्दीन को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना अपने आप में असामान्य था। 31 अक्टूबर, 2025 को मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने एक रणनीतिक कदम के तहत पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान (Indian cricket captain) को राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना और जुबली हिल्स उपचुनाव को प्रभावित करना था। हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, जो व्यक्ति विधानमंडल का सदस्य नहीं है, उसे मंत्री नियुक्ति के छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना अनिवार्य है।
जल्दबाजी में मंत्रिमंडल में किया गया था शामिल
अजहरुद्दीन के लिए यह समय-सीमा अप्रैल 2026 में समाप्त हो रही है। जुबली हिल्स उपचुनाव के दौरान, अजहरुद्दीन को बिना किसी सदन के सदस्य बने जल्दबाजी में मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। दरअसल, कांग्रेस सरकार ने उन्हें राज्यपाल कोटे से एमएलसी के रूप में समायोजित करने की योजना बनाई थी। लेकिन यह मामला कानूनी जटिलताओं में फंस गया। सत्ता में आने के बाद सरकार ने प्रोफेसर कोदंडाराम और वरिष्ठ पत्रकार आमेर अली खान को राज्यपाल कोटे से एमएलसी नामित किया। इन नियुक्तियों को विपक्षी बीआरएस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद अदालत ने इन्हें रद्द कर दिया और अंतिम फैसले तक किसी भी नई नियुक्ति पर रोक लगा दी। इसके बाद 30 अगस्त को मंत्रिमंडल ने राज्यपाल को एक प्रस्ताव भेजकर प्रोफेसर कोदंडाराम और अजहरुद्दीन को एमएलसी नामित करने की सिफारिश की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देश के चलते, दोनों को शपथ नहीं दिलाई जा सकी।
अगली तीन एमएलसी सीटें नवंबर 2026 में ही होंगी खाली
वर्तमान में विधान परिषद में कोई रिक्ति नहीं है, और अगली तीन एमएलसी सीटें नवंबर 2026 में ही खाली होंगी। ऐसे में अजहरुद्दीन के पास विकल्प सीमित हैं। यदि एमएलसी कविता का इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया जाता है, तो उनकी सीट—जो निजामाबाद की स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से है—स्थानीय निकाय चुनाव कराए बिना भरी नहीं जा सकती।कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला ही अजहरुद्दीन के मंत्री बने रहने का एकमात्र व्यवहार्य रास्ता है। कांग्रेस नेताओं के बारे में बताया जा रहा है कि वे अनिश्चितता समाप्त करने के लिए शीर्ष अदालत से शीघ्र स्पष्टीकरण या राहत मांगने की संभावना तलाश रहे हैं। यदि 30 अप्रैल तक कोई समाधान नहीं निकलता, तो अजहरुद्दीन को इस्तीफा देना पड़ सकता है।
नंदमुरी हरिकृष्ण को मंत्रिमंडल से देना पड़ा था इस्तीफा
राजनीतिक हलकों में यह अटकलें भी हैं कि उन्हें अस्थायी रूप से पद छोड़ने को कहा जा सकता है और प्रस्तावित मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान फिर से शामिल किया जा सकता है, जिससे उन्हें छह महीने का अतिरिक्त समय मिल जाए—इस उम्मीद में कि या तो अदालत का फैसला आ जाए या कोई एमएलसी सीट खाली हो जाए। अतीत में ऐसी ही स्थिति के कारण पूर्व मुख्यमंत्री एन. टी. रामाराव के पुत्र नंदमुरी हरिकृष्ण को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था, जिसके बाद उनका विधायी करियर कभी पटरी पर नहीं लौट सका। कई लोग अब अजहरुद्दीन की स्थिति में उसी घटना की झलक देख रहे हैं। फिलहाल, अजहरुद्दीन और कांग्रेस नेतृत्व दोनों के सामने एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक इम्तिहान है, और समय तेजी से निकलता जा रहा है।
क्या अजहरुद्दीन ने वर्ल्ड कप जीता था?
भारतीय टीम के सदस्य के रूप में उन्होंने कभी विश्व कप नहीं जीता। उनके करियर के दौरान भारत 1983 और 2011 में चैंपियन बना, लेकिन वे इन विजेता टीमों का हिस्सा नहीं थे।
क्रिकेटर अजहरुद्दीन के कितने बच्चे हैं?
परिवार में उनके दो बेटे हैं। दोनों ही अपने-अपने पेशे में सक्रिय रहे हैं और समय-समय पर सार्वजनिक रूप से चर्चा में भी आए हैं।
अजहरुद्दीन की कुल संपत्ति कितनी है?
अनुमानों के अनुसार उनकी कुल संपत्ति लगभग ₹50–60 करोड़ के आसपास बताई जाती है। इसमें क्रिकेट से हुई आय, राजनीति, व्यवसाय और अन्य निवेश शामिल माने जाते हैं।
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