हैदराबाद । बीआरएस (BRS) एमएलसी डॉ. श्रीवाण दासोजू ने कांग्रेस सरकार पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि जीएचएमसी वार्ड परिसीमन और बाहरी नगरपालिकाओं के विलय के माध्यम से सरकार संविधान (Constitution) और तेलंगाना की आत्मा पर सीधे हमला कर रही है।
सरकार की कार्रवाई को “तानाशाही” और “गुप्त” बताया
रविवार को जारी 45-स्लाइड की विस्तृत प्रस्तुति में एमएलसी ने सरकार की कार्रवाई को “तानाशाही” और “गुप्त” बताते हुए इसका खुलासा किया। उन्होंने कहा कि वार्ड परिसीमन केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें लोकतांत्रिक बहस, विरोध की आवाज़ और जनता की सहमति शामिल होनी चाहिए। दासोजू ने रेवंथ रेड्डी प्रशासन पर 74वें संविधान संशोधन का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि राज्य चुनाव आयोग को दरकिनार करके इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को निजी संस्थाओं जैसे एएससीआई और सीजीजी को सौंपना संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
परिसीमन एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया
एमएलसी ने सुप्रीम कोर्ट के मेघराज कोठारी बनाम डेलिमीटेशन कमीशन मामले का हवाला देते हुए कहा कि परिसीमन एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और इसे केवल नौकरशाही कार्य मानकर नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि पारंपरिक समुदायों को विभाजित कर विरोधी ठिकानों को कमजोर करने के लिए सीमाओं को फिर से खींचा जा रहा है, जिससे शहर की सदियों पुरानी गंगा-जमुना तहज़ीब खतरे में है।
इसका लाभ केवल रियल एस्टेट माफिया को
डॉ. दासोजू ने कहा कि जीएचएमसी का विस्तार 650 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 2053 वर्ग किलोमीटर करना “बहु-अरब डॉलर की रियल एस्टेट धोखाधड़ी” है। उन्होंने “फ्यूचर सिटी” परियोजना को शहरी अव्यवस्था का सूत्र बताते हुए कहा कि इसका लाभ केवल रियल एस्टेट माफिया को होगा, जबकि मुख्य शहर की आधारभूत संरचना लगातार जर्जर होती जा रही है।
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