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Supreme Court- सुप्रीम कोर्ट का आवारा कुत्तों पर सख्त फरमान, अगर प्यार है तो घर ले जाएं

Anuj Kumar
Anuj Kumar
Supreme Court- सुप्रीम कोर्ट का आवारा कुत्तों पर सख्त फरमान, अगर प्यार है तो घर ले जाएं

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने लावारिस कुत्तों (Abandoned dogs) की बढ़ती समस्या और उनके हमलों से होने वाली मौतों व चोटों पर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कड़े शब्दों में जताई नाराजगी

विशेष पीठ ने स्पष्ट किया कि लावारिस कुत्तों के हमले से होने वाले किसी भी नुकसान के लिए अब नगर निगमों के साथ-साथ उन लोगों पर भी जिम्मेदारी होगी जो इन कुत्तों को खाना खिलाते हैं।

अदालत का सवाल: अगर लगाव है तो घर क्यों नहीं ले जाते?

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता (Justice Sandeep Mehta) और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान उन लोगों से तीखा सवाल किया जो इन जानवरों की हिमायत करते हैं। अदालत ने कहा, “यदि आपको इन जानवरों से इतना लगाव है, तो आप इन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते?”

राज्य सरकारें और स्थानीय निकायों पर फेल होने का आरोप

पीठ ने कहा कि राज्य सरकारें और स्थानीय निकाय पिछले पांच वर्षों से आवारा जानवरों से जुड़े नियमों और कानूनों को लागू करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। अदालत ने चेतावनी दी कि अब ऐसे मामलों में प्रशासन पीड़ितों को भारी मुआवजा देगा।

जिम्मेदारी तय करने के कड़े निर्देश

जस्टिस मेहता ने सवाल उठाया कि जब कुत्ते किसी नौ साल के मासूम बच्चे पर हमला करते हैं, तो किसे जिम्मेदार माना जाना चाहिए? अदालत ने कहा कि पालतू जानवर रखने वालों को लाइसेंस (License) लेना अनिवार्य होना चाहिए।

सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को हटाने के निर्देश

अदालत ने याद दिलाया कि नगर निकायों को बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अस्पतालों जैसे सार्वजनिक स्थानों से लावारिस कुत्तों को हटाने का पहले ही निर्देश दिया गया था। उठाने, टीकाकरण और नसबंदी के बाद इन्हें वापस भीड़भाड़ वाली जगह पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

भावनाओं पर नहीं, सुरक्षा पर ध्यान दें

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब तक भावनाएं केवल कुत्तों के प्रति दिखाई गई हैं, लेकिन उन पीड़ितों के प्रति नहीं जो इनके हमलों का शिकार होते हैं।

कानून के पालन में ढिलाई अब स्वीकार्य नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है और कानून को लागू करने में बरती गई ढिलाई अब स्वीकार्य नहीं होगी।

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पशु प्रेमियों का पक्ष भी सुना गया

सुनवाई के दौरान अदालत ने एक पशु प्रेमी का पक्ष भी सुना, जिन्होंने बताया कि व्यवहार और प्रेम से कुत्तों की आक्रामकता कम की जा सकती है

भारत में कितने Supreme Court हैं?

भारत में केवल एक ही सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) है, जो नई दिल्ली में स्थित है और देश का सर्वोच्च न्यायिक प्राधिकरण है, जिसके साथ भारत में 25 उच्च न्यायालय (High Courts) हैं जो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए काम करते हैं. 

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