धार्मिक महाकुंभ का आयोजन
मोतिहारी में स्थापित किए गए विशाल शिवलिंग को देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु जुट रहे हैं। इसे “दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग” बताया जा रहा है।
वाराणसी और अयोध्या के पंडितों ने की पूजा
8 पवित्र नदियों के जल से अभिषेक- इस शिवलिंग का जलाभिषेक 8 पवित्र नदियों के जल से किया गया। वाराणसी और अयोध्या के पंडितों ने विधिपूर्वक पूजा और मंत्रोच्चारण किया।
बिहार के मोतिहारी (Motihari) के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर में शनिवार यानी आज विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग स्थापित हो गया है। वाराणसी और अयोध्या से आए पंडित मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की। गंगा-यमुना समेत 8 पवित्र नदियों के जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद सहस्त्रालिंगम शिवलिंग की स्थापना हुई।
पूजा में महावीर मंदिर न्यास बोर्ड के सचिव सायन कुणाल और उनकी सांसद पत्नी शांभवी ने की। इलाके में मेले जैसा माहौल है, दूर-दूर से हजारों की संख्या में लोग आए हैं। फूल-पूजा के सामान की छोटी-बड़ी दुकानें सजी हुई हैं।
इस कार्यक्रम में (CM) नीतीश कुमार भी शामिल होंगे। सुरक्षा को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है। शिवलिंग की स्थापना देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु आए हैं।
अयोध्या-वाराणसी से 7 पंडित पूजा कराने पहुंचे
शनिवार को सुबह 8 से करीब 11 बजे तक पूजा हुई। इसके बाद हवन और फिर शिवलिंग की स्थापना हुआ। पूजा के लिए महावीर मंदिर से करीब सात पंडित पहुंचे। साथ ही अयोध्या राम मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, गुजरात, हरिद्वार, महाराष्ट्र से भी पंडित आए।
सहस्त्रलिंगम की स्थापना के दौरान होने वाले भव्य यज्ञ में चारों वेदों के विद्वानों को आमंत्रित किया गया। 4 LED स्क्रीन लगाए गए, जिससे लोगों ने लाइव स्थापना को देखा।
शिवलिंग की स्थापना के लिए कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, यमुनोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज, गंगा सागर, सोनपुर, रामेश्वरम से गंगा जल मंगाया गया। इसके साथ ही सिंधु, नर्मदा, नारायणी, कावेरी, गंडक नदी के जल से भी अभिषेक हुआ।
कंबोडिया से मंगाए गए हैं फूल
पूजा के लिए कंबोडिया और कोलकाता से फूल मंगवाए गए। मंदिर परिसर में स्थापना को लेकर एक ट्रक फूल आया, जिसमें गुलाब, गेंदा, गुलदाउदी के फूल शामिल हैं।शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए खास तरह की 18 फीट की माला तैयार की गई, जिसे फूल सहित भांग, धतूरा, बेलपत्र मिलाकर बनाया गया।
आज ही क्यों हुई स्थापना
17 जनवरी को माघ कृष्ण चतुर्दशी की तिथि है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी और भगवान शिव की लिंग के रूप में पूजा हुई थी।
इस दिन का महत्व शिवरात्रि के समान माना जाता है, इसलिए स्थापना के लिए यह दिन चुना गया है। वहीं, शिवलिंग के पूर्व दिशा में स्थित एक बड़े मंडप में यज्ञ स्थल का निर्माण किया गया है।
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वहीं, शिवलिंग को इंस्टॉल करने के लिए राजस्थान और भोपाल से दो क्रेन मंगाए गए हैं। स्थापना से एक दिन पहले इन क्रेन की मदद से ट्रायल भी किया गया। यह दोनों क्रेन 750 टन की कैपेसिटी के हैं और इसकी मॉनिटरिंग टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज कर रही है।
जिस रास्ते से श्रीराम जनकपुर से अयोध्या गए, वहां विराजेंगे महादेव
मान्यता है कि श्रीराम जनकपुर में शादी के बाद इसी रास्ते अयोध्या गए थे। उसी रास्ते में महादेव विराजमान होंगे। अरेराज महात्म्य और गरुड़ पुराण में इसका जिक्र है।
राम केसरिया के रास्ते अरेराज होते अयोध्या गमण किए थे। अरेराज सोमेश्वर नाथ मंदिर में माता सीता के साथ श्रीराम ने पूजा-अर्चना भी की थी।
मोतिहारी का इतिहास क्या है?
मोतिहारी प्रसिद्ध लेखक जॉर्ज ऑरवेल (जन्म नाम एरिक आर्थर ब्लेयर) और महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह की जन्मभूमि होने के कारण विशेष महत्व रखता है । मोतिहारी और आसपास के स्थानों का बौद्ध धर्म से भी पुराना संबंध है। दुनिया का सबसे ऊंचा स्तूप केसरिया में है, जो मोतिहारी से मात्र एक घंटे की दूरी पर स्थित है।
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