नई दिल्ली । अनुभवी बैडमिंटन स्टार और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता साइना नेहवाल (Saina Nehwal) ने खेल से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि फिटनेस और लगातार चोटों के कारण अब प्रतिस्पर्धी खेलों में बने रहना संभव नहीं है
फिटनेस और चोट बनी संन्यास की वजह
साइना ने संन्यास की घोषणा करते हुए कहा कि उनकी फिटनेस अब पहले जैसी नहीं रही है। घुटने की लगातार समस्या के कारण वह काफी समय से खेल से दूर थीं और उच्च स्तर की ट्रेनिंग कर पाना उनके लिए मुश्किल हो गया था।

2023 में खेला था आखिरी मुकाबला
साइना ने अंतिम बार वर्ष 2023 में सिंगापुर (Singapore) ओपन में मुकाबला खेला था। बीते ढाई से तीन साल से वह पेशेवर बैडमिंटन से दूर थीं और इसी दौरान उनके संन्यास को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं।
घुटने की गंभीर समस्या ने बढ़ाई मुश्किलें
नेहवाल ने बताया कि उनके घुटने का कार्टिलेज (Cartilage) पूरी तरह खराब हो चुका है और उन्हें जोड़ो की बीमारी भी है। उन्होंने कहा कि शीर्ष स्तर पर बने रहने के लिए रोज़ाना आठ से नौ घंटे की ट्रेनिंग जरूरी होती है, लेकिन उनका घुटना एक-दो घंटे में ही दर्द करने लगता था।

‘अब और खेल पाना संभव नहीं था’
साइना ने कहा, “मैंने दो साल पहले ही खेलना छोड़ दिया था। मैंने अपनी क्षमता के अनुसार खेला और अब संन्यास की घोषणा की है। अगर आप और खेलने में सक्षम नहीं हैं तो खेल में बने रहने का कोई मतलब नहीं है।”
सम्मान और पुरस्कारों से भरा रहा करियर
अपने शानदार करियर के दौरान साइना नेहवाल को अर्जुन पुरस्कार (2009), मेजर ध्यानचंद खेल रत्न (2010), पद्म श्री (2010) और पद्म भूषण (2016) जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया।
भारतीय बैडमिंटन की ऐतिहासिक उपलब्धियां
गौरतलब है कि साइना नेहवाल बैडमिंटन में ओलंपिक कांस्य पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी थीं। वह वर्ष 2015 में विश्व रैंकिंग में नंबर-1 स्थान पर भी पहुंचीं।
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खिताबों और स्वर्ण पदकों से सजा रहा सफर
साइना ने बीडब्ल्यूएफ विश्व जूनियर चैंपियनशिप 2008 जीती, जबकि 2009 इंडोनेशिया ओपन सुपर सीरीज खिताब भी उनके नाम रहा। उन्होंने 2010 और 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा और इन खेलों में दो एकल स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं।
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