मुंबई । बॉलीवुड एक्ट्रेस और सांसद कंगना रनौत (Kangna Ranaut) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा पोस्ट साझा करते हुए फैशन डिजाइनर मसाबा गुप्ता के साथ हुए कथित भेदभाव का खुलासा किया है। कंगना ने इस पोस्ट में अपने निजी अनुभव को साझा करते हुए फैशन इंडस्ट्री में मौजूद पक्षपात पर सवाल उठाए हैं।
‘तेजस’ के प्रमोशन के दौरान हुआ अनुभव साझा
कंगना ने बताया कि फिल्म ‘तेजस (Tejas) के प्रमोशन के दौरान जब वह राम जन्मभूमि दर्शन के लिए जा रही थीं, तब उन्होंने उसी स्टाइलिस्ट से मदद मांगी जो उन्हें अन्य फिल्मी इवेंट्स के लिए स्टाइल कर रही थी। इस दौरान उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि कई नामी डिजाइनर और ब्रांड उनकी तस्वीरों को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर क्यों साझा नहीं करते।
डिजाइनर्स और स्टाइलिस्ट्स द्वारा बैन किए जाने का दावा
कंगना ने अपने पोस्ट में लिखा कि कई डिजाइनर और स्टाइलिस्ट उन्हें अपने सोशल मीडिया हैंडल्स (Social Media Handles) से बैन कर चुके हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि मसाबा गुप्ता से जुड़ा अनुभव उन्हें सबसे ज्यादा दुख पहुंचाने वाला रहा।
राम जन्मभूमि दर्शन पर पहनावे को लेकर आपत्ति
कंगना के मुताबिक, मसाबा गुप्ता ने प्रमोशन के लिए कपड़े स्टाइलिस्ट को भेजे थे, लेकिन जब उन्हें पता चला कि ये कपड़े राम जन्मभूमि दर्शन के लिए पहने जाने हैं, तो उन्होंने स्टाइलिस्ट से कहा कि उनके कपड़ों का इस्तेमाल न किया जाए।
स्टाइलिस्ट ने चुपके से दी जानकारी
कंगना ने लिखा कि स्टाइलिस्ट ने उनसे चुपके से कहा कि वह मसाबा या उनके ब्रांड को टैग न करें और यह भी बताया कि साड़ी की कीमत उसने अपनी जेब से चुकाई है। कंगना ने बताया कि जब तक उन्हें पूरी सच्चाई पता चली, तब तक वह दर्शन के लिए तैयार होकर निकल चुकी थीं।
“आज भी याद कर उल्टी जैसा महसूस होता है”
इस अनुभव को याद करते हुए कंगना ने लिखा कि यह घटना नफरत, कड़वाहट और भेदभाव से भरी हुई थी। उन्होंने कहा कि आज भी इस घटना को सोचकर उन्हें उल्टी जैसा महसूस होता है और यह याद उन्हें गहराई तक परेशान करती है।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं
कंगना के इस पोस्ट के बाद एक्स और ट्विटर पर फैंस और आलोचक दोनों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कुछ लोग उनकी ईमानदारी और बेबाकी की तारीफ कर रहे हैं, जबकि कुछ ने फिल्म और फैशन इंडस्ट्री में भेदभाव के मुद्दे पर बहस छेड़ दी है।
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भेदभाव की याद आज भी देती है दर्द
कंगना ने अंत में लिखा कि यह अनुभव उन्हें गहरी चोट पहुंचा गया और आज भी उस भेदभाव की याद उन्हें मानसिक रूप से परेशान करती है।
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