सैन फ्रांसिस्को। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप (Whatassapp) को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। व्हाट्सऐप के वॉइस कॉल फीचर में मौजूद एक खतरनाक जीरो-डे वल्नरेबिलिटी के जरिए हैकर्स यूजर्स के स्मार्टफोन को आसानी से निशाना बना सकते हैं।
बिना कॉल उठाए भी हो सकता है फोन हैक
साइबर एक्सपर्ट्स (Cyber Experts) के अनुसार, इस खामी का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इसके लिए न तो कॉल रिसीव करने की जरूरत होती है और न ही किसी लिंक पर क्लिक करने की। कुछ मामलों में सिर्फ इनकमिंग या मिस्ड व्हाट्सऐप वॉइस कॉल ही इस साइबर हमले को ट्रिगर कर सकती है। यूजर को इसकी भनक तक नहीं लगती और बैकग्राउंड में फोन में खतरनाक कोड इंस्टॉल हो जाता है।
क्या होती है जीरो-डे वल्नरेबिलिटी
जीरो-डे वल्नरेबिलिटी ऐसी सुरक्षा खामी को कहा जाता है, जिसकी जानकारी ऐप या सॉफ्टवेयर (App and Software) बनाने वाली कंपनी को पहले से नहीं होती। जब तक डेवलपर इसका सिक्योरिटी पैच जारी करता है, तब तक साइबर अपराधी इस कमजोरी का फायदा उठा लेते हैं। इसी कारण जीरो-डे अटैक को सबसे खतरनाक साइबर हमलों में गिना जाता है।
निजी डेटा और बैंकिंग जानकारी पर मंडराया खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि व्हाट्सऐप वॉइस कॉल सिस्टम के जरिए हैकर्स डिवाइस में मैलिशियस कोड इंजेक्ट कर सकते हैं। एक बार फोन हैक हो जाने के बाद यूजर की निजी तस्वीरें, चैट्स, कॉन्टैक्ट लिस्ट और यहां तक कि बैंकिंग व अन्य फाइनेंशियल डेटा भी खतरे में पड़ सकता है। इससे पहचान की चोरी और डिजिटल फ्रॉड का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
त्योहारों और छुट्टियों में बढ़ जाता है खतरा
साइबर रिसर्चर्स के मुताबिक, ऐसे हमले त्योहारों, छुट्टियों और ट्रैवल सीजन के दौरान ज्यादा देखे जाते हैं। इस समय अनजान नंबरों से कॉल और मैसेज की संख्या बढ़ जाती है, जिसका फायदा साइबर अपराधी उठाते हैं।
फिशिंग से भी ज्यादा खतरनाक तरीका
फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन का कहना है कि यह तरीका पारंपरिक फिशिंग अटैक्स से कहीं ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि इसमें यूजर की किसी भी तरह की गलती या इंटरैक्शन की जरूरत नहीं होती।
साइबर एक्सपर्ट्स की अहम सलाह
सुरक्षा विशेषज्ञों ने यूजर्स को सलाह दी है कि वे व्हाट्सऐप को हमेशा लेटेस्ट वर्जन में अपडेट रखें, अनजान नंबरों से आने वाली कॉल्स को लेकर सतर्क रहें और फोन की सिक्योरिटी सेटिंग्स को मजबूत बनाएं। थोड़ी सी सावधानी बरतकर ऐसे खतरनाक साइबर हमलों से बचा जा सकता है।
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