दोहा: ट्रम्प के इस शांति(Peace) बोर्ड में पाकिस्तान, कतर, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने शामिल होने पर सहमति जताई है। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर इसे साझा फैसला बताया। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का मुख्य उद्देश्य गाजा के प्रशासन की देखरेख करना, पुनर्निर्माण के लिए फंड जुटाना और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना है। ट्रम्प खुद इस बोर्ड की अध्यक्षता कर रहे हैं, जो एक नई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का संकेत है।
पुतिन की एंट्री और 1 अरब डॉलर का योगदान
राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया है कि रूस(Russia) के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस बोर्ड में शामिल होने के लिए सहमत हो गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि पुतिन ने बोर्ड के लिए 1 अरब डॉलर देने की पेशकश की है। यह राशि अमेरिका में ‘फ्रीज'(Peace) की गई रूसी संपत्ति से दी जा सकती है। इसके अलावा, बोर्ड की सदस्यता के लिए $1 बिलियन के योगदान की खबरों पर व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि यह कोई अनिवार्य शुल्क नहीं है, बल्कि स्थायी सदस्यता के लिए एक प्रतिबद्धता का विकल्प है।
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इजराइल की नाराजगी और भविष्य की चुनौतियां
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस बोर्ड के गठन और इसमें शामिल सदस्यों को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। इजराइल विशेष रूप(Peace) से तुर्किये की भागीदारी से नाराज है, जिसे वह हमास का समर्थक मानता है। इजराइल का कहना है कि यह बोर्ड उसकी राष्ट्रीय नीतियों के खिलाफ है। दूसरी ओर, ट्रम्प की योजना में गाजा के भीतर ‘मिरेकल सिटीज’ और विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव है, जिससे निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने वाले 8 इस्लामिक देश कौन से हैं?
इसमें पाकिस्तान, कतर, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, सऊदी अरब(Peace) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं।
रूस इस बोर्ड के लिए 1 अरब डॉलर का फंड कहां से देगा?
रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने संकेत दिया है कि यह पैसा अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा फ्रीज (जब्त) की गई रूसी संपत्ति से दिया जा सकता है, जो 2022 के यूक्रेन युद्ध के बाद से प्रतिबंधित है।
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