हैदराबाद। बीसी आरक्षण उपलब्धि समन्वय जेएसी (JAC) द्वारा आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में शुक्रवार को ओबीसी के लिए विधायी निकायों में आरक्षण और ओबीसी मामलों के लिए अलग केंद्रीय मंत्रालय की मांग दोहराई गई। सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय बीसी दल के अध्यक्ष और जेएसी चेयरमैन दुंद्रा कुमारस्वामी (Dundara Kumaraswamy) ने कहा कि जब तक संसद ओबीसी को विधायी संस्थाओं में आरक्षण देने का कानून पारित नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि बहुसंख्यक होने के बावजूद ओबीसी राजनीतिक रूप से उपेक्षित हैं।
ओबीसी नेता, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता हुए शामिल
इस संगोष्ठी में पूर्व अतिरिक्त कलेक्टर राजेशम, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रमादेवी, तेलंगाना सीपीआई के राज्य सचिव वेंकटस्वामी, राष्ट्रीय बीसी दल के जीएचएमसी अध्यक्ष राजेश यादव सहित कई राज्यों से आए ओबीसी नेता, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। वक्ताओं ने विधायी आरक्षण के अभाव पर चिंता जताई और केंद्र सरकार पर वर्षों से लंबित मांगों को टालने का आरोप लगाया। कुमारस्वामी ने ओबीसी विधायी आरक्षण विधेयक को नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की, ताकि कानूनी अड़चनों से बचा जा सके। संगोष्ठी का समापन देशव्यापी आंदोलन तेज करने और ओबीसी संगठनों के बीच समन्वय मजबूत करने के प्रस्ताव के साथ हुआ।
आरक्षण क्या है?
आरक्षण वह सरकारी नीति है जिसमें शिक्षा, नौकरी और संसद/विधानसभा में विशेष समूहों को निर्धारित प्रतिशत सीटें दी जाती हैं। इसका उद्देश्य पिछड़े वर्गों, आदिवासियों और अन्य वंचित समूहों को समान अवसर प्रदान करना और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है।
आरक्षण के जनक कौन थे?
भारत में आरक्षण की नींव बी. आर. अंबेडकर ने डाली थी। उन्होंने संविधान निर्माण में यह सुनिश्चित किया कि अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़े वर्गों को शिक्षा, सरकारी नौकरी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उचित हिस्सेदारी मिले।
किस जाति को कितना आरक्षण है?
भारत में आरक्षण प्रतिशत वर्ग के अनुसार अलग-अलग है:
- अनुसूचित जाति (SC): 15%
- अनुसूचित जनजाति (ST): 7.5%
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 27%
- विशेष राज्य या क्षेत्रीय आरक्षण अलग-अलग लागू होता है।
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