निवेश के नए शिखर
नई दिल्ली: साल 2026 की शुरुआत के मात्र 27 दिनों के भीतर चांदी की कीमतों में ₹1.12 लाख से ज्यादा(Gold) की बढ़ोतरी हुई है, जो अब ₹3.42 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, 24 कैरेट सोना भी ₹1.59 लाख प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया है। दिसंबर 2025 के मुकाबले यह उछाल यह बताता है कि कीमती धातुएं अब केवल आभूषण नहीं, बल्कि सबसे सुरक्षित वित्तीय संपदा (Safe Haven) बन गई हैं।
बाजार में अस्थिरता के मुख्य कारण
इस भारी तेजी के पीछे तीन बड़े वैश्विक कारण हैं। पहला, डोनाल्ड ट्रंप और ग्रीनलैंड विवाद(Gold) से उपजी भू-राजनीतिक अस्थिरता; दूसरा, रुपए की ऐतिहासिक कमजोरी (₹91.10 प्रति डॉलर), जिससे आयात महंगा हो गया है; और तीसरा, दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों द्वारा सोने की भारी खरीदारी। इसके अतिरिक्त, सोलर और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंडस्ट्री में चांदी की बढ़ती औद्योगिक मांग ने इसकी कीमतों में आग लगा दी है।
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भविष्य का अनुमान और सावधानी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ, तो सोना(Gold) ₹1.90 लाख और चांदी ₹4 लाख के जादुई आंकड़े को भी छू सकती है। ऐसे में आम ग्राहकों को BIS हॉलमार्क देखकर ही खरीदारी करने की सलाह दी जाती है। साथ ही, शुद्धता की जांच के लिए चांदी पर मैग्नेट और आइस टेस्ट जैसे घरेलू तरीके अपनाकर धोखाधड़ी से बचा जा सकता है।
चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी क्यों देखी जा रही है?
चांदी की तेजी का मुख्य कारण इसकी ‘इंडस्ट्रियल डिमांड’ है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के निर्माण में चांदी का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है, जिससे यह अब केवल सजावट की वस्तु न रहकर एक अनिवार्य कच्चा माल बन गई है।
क्या अभी सोना खरीदना एक सही निवेश निर्णय है?
जानकारों के अनुसार, जब तक डॉलर(Gold) के मुकाबले रुपया कमजोर है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रेड वॉर का खतरा बना हुआ है, तब तक कीमतों में तेजी रहने की उम्मीद है। हालांकि, ₹1.90 लाख के अनुमानित लक्ष्य को देखते हुए निवेश किया जा सकता है, लेकिन बाजार के जोखिमों को समझना भी जरूरी है।
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