हैदराबाद। तेलंगाना सरकार के सलाहकार और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अली शब्बीर (Mohammed Ali Shabbir) ने केंद्रीय बजट 2026–27 की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा-नीत केंद्र सरकार ने एक बार फिर अल्पसंख्यक कल्याण (minority interest) को प्राथमिकता देने में विफलता दिखाई है, जबकि कुल बजटीय व्यय में भारी वृद्धि की गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शब्बीर अली ने बताया कि वर्ष 2026–27 के लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का कुल आवंटन मात्र 3,400 करोड़ रुपए रखा गया है। इसमें 3,395.62 करोड़ रुपए राजस्व मद और 4.38 करोड़ रुपए पूंजीगत व्यय शामिल है।
केवल 50 करोड़ रुपए की मामूली वृद्धि
उन्होंने कहा कि यह पिछले वर्ष की तुलना में केवल 50 करोड़ रुपए की मामूली वृद्धि है, जबकि कुल केंद्रीय बजट में तेज़ी से विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट का कुल व्यय 2025–26 में लगभग 50.65 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2026–27 में अनुमानित 53.5 लाख करोड़ रुपए हो गया है, यानी एक ही वर्ष में 2.85 लाख करोड़ से अधिक की वृद्धि। इतनी बड़ी बढ़ोतरी में से अल्पसंख्यकों को केवल 50 करोड़ देना यह स्पष्ट करता है कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं, उन्होंने कहा। शब्बीर अली ने जोड़ा कि देश की आबादी में 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी होने के बावजूद अल्पसंख्यकों को राष्ट्रीय संसाधनों में नगण्य भाग मिल रहा है।
कई राज्यों के व्यक्तिगत आवंटन से भी कम
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पूरे देश के लिए केंद्र सरकार का अल्पसंख्यक कल्याण पर किया गया व्यय अब कई राज्यों के व्यक्तिगत आवंटन से भी कम है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस शासित तेलंगाना ने 2025–26 में अपने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के लिए 3,591 करोड़ का प्रावधान किया है, जबकि कर्नाटक ने विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 4,000 करोड़ से अधिक का आवंटन किया है। शब्बीर अली ने कहा कि बजट के प्रतिशत के लिहाज से भी राज्य सरकारें अपेक्षाकृत अधिक प्रतिबद्धता दिखा रही हैं।
जहां तेलंगाना अपने बजट का लगभग 1.18 प्रतिशत अल्पसंख्यक कल्याण पर खर्च कर रहा है, वहीं केंद्र सरकार का आवंटन कुल राष्ट्रीय बजट का अत्यंत नगण्य हिस्सा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र लगातार केंद्रीय बजट की अनदेखी का शिकार हो रहा है। अल्पसंख्यकों के लिए छात्रवृत्ति, फेलोशिप और शैक्षणिक सहायता योजनाएं या तो ठहर गई हैं या कमजोर कर दी गई हैं, जिससे पहली पीढ़ी के विद्यार्थियों पर सबसे अधिक असर पड़ रहा है। कौशल विकास और आजीविका कार्यक्रमों को भी पर्याप्त समर्थन नहीं मिला है।
2025 से 2026 के लिए केंद्रीय बजट क्या है?
भारत सरकार का केंद्रीय बजट 2025–26 उस वित्तीय वर्ष की आर्थिक रूपरेखा है जो 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक लागू रहती है। इसमें सरकार की आय, खर्च, कर नीतियाँ और विकास प्राथमिकताएँ तय की जाती हैं। बजट में आम तौर पर कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढाँचा, सामाजिक कल्याण और रोजगार पर ध्यान दिया जाता है। इसका उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना, महंगाई नियंत्रित रखना और समाज के कमजोर वर्गों को राहत देना होता है।
2025 से 2026 के लिए बजट क्या है?
असल में, बजट 2025–26 भारत की आर्थिक योजना का आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसे केंद्र सरकार संसद में प्रस्तुत करती है। यह बताता है कि सरकार अगले एक साल में पैसा कहाँ से जुटाएगी और किन क्षेत्रों में खर्च करेगी। इसमें टैक्स से जुड़े प्रस्ताव, सब्सिडी, योजनाएँ और नीतिगत सुधार शामिल रहते हैं। बजट का मुख्य लक्ष्य राजकोषीय संतुलन बनाए रखते हुए विकास, निवेश और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना होता है।