తెలుగు | Epaper

Bangladesh: बांग्लादेश चुनाव पर संकट के बादल

Dhanarekha
Dhanarekha
Bangladesh: बांग्लादेश चुनाव पर संकट के बादल

सजीब वाजेद ने किया ‘वोट बहिष्कार’ का आह्वान

काठमांडू: शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने 12 फरवरी(Bangladesh) को होने वाले आम चुनावों को पूरी तरह से ‘पक्षपातपूर्ण’ और ‘बनावटी’ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोहम्मद यूनुस(Mohammad Yunus) के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने न केवल अवामी लीग को चुनाव से बाहर रखा है, बल्कि सभी प्रगतिशील पार्टियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। जॉय के अनुसार, यह चुनाव एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया न होकर एक ‘तमाशा’ है, जिसमें नतीजे पहले से ही तय हैं। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे इस ‘फर्जी’ चुनाव में हिस्सा लेकर इसे वैधता (Legitimacy) न दें और मतदान का पूर्ण बहिष्कार करें

आतंकवाद और चरमपंथ की वापसी का दावा

सजीब ने देश की सुरक्षा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान सरकार(Bangladesh) इस्लामी चरमपंथियों का ‘मुखौटा’ मात्र है। उन्होंने दावा किया कि अवामी लीग के 17 साल के शासन में देश आतंकवाद से मुक्त था, लेकिन अब अल-कायदा और लश्कर-ए-तालिबान जैसे संगठनों के नेता खुलेआम रैलियां कर रहे हैं। उनके अनुसार, अगर जनता ने इस व्यवस्था को स्वीकार किया, तो बांग्लादेश पूरी तरह से आतंकियों के हाथों में चला जाएगा। उन्होंने अवामी लीग के कार्यकर्ताओं के साथ हो रही हिंसा और ज्यादतियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।

अन्य पढ़े: आंदोलन कुचलने के लिए महिलाओं पर अमानवीय अत्याचार

अंतरिम सरकार की निष्पक्षता पर सवाल

अगस्त 2024 की हिंसा के बाद शेख हसीना(Bangladesh) के भारत पलायन और उसके बाद बनी अंतरिम सरकार की कार्यशैली पर सजीब ने तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि डाक मतपत्रों (Postal Ballots) का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और लोगों पर जबरन वोट डालने का दबाव बनाया जा रहा है। जॉय का कहना है कि यह चुनाव केवल इसलिए कराया जा रहा है ताकि एक विशेष विचारधारा को सत्ता सौंपी जा सके। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय और बांग्लादेश की जनता को इस “बनावटी लोकतंत्र” को पहचानना होगा।

शेख हसीना की अवामी लीग को चुनाव लड़ने से क्यों रोका गया है?

अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन(Bangladesh) और बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। अंतरिम सरकार और विपक्षी गुटों का आरोप है कि अवामी लीग ने अपने शासन के दौरान मानवाधिकारों का उल्लंघन किया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया। इसी आधार पर कानूनी और राजनीतिक दबाव के चलते फिलहाल अवामी लीग को 12 फरवरी के चुनावों से दूर रखा गया है।

सजीब वाजेद के ‘चुनाव बहिष्कार’ की अपील का क्या प्रभाव हो सकता है?

अवामी लीग का बांग्लादेश में अभी भी एक बड़ा कैडर और आधार है। यदि पार्टी के समर्थक मतदान केंद्रों तक नहीं जाते हैं, तो चुनाव में वोटिंग प्रतिशत काफी कम रह सकता है। इससे चुनी जाने वाली नई सरकार की अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्वीकार्यता पर सवाल उठ सकते हैं और देश में अस्थिरता का माहौल बना रह सकता है।

अन्य पढ़े:

📢 For Advertisement Booking: 98481 12870