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Xi Jinping: शी जिनपिंग ने जनरलों पर चलाई कैंची

Dhanarekha
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Xi Jinping: शी जिनपिंग ने जनरलों पर चलाई कैंची

चीनी सेना में अभूतपूर्व सत्ता सफाई

बीजिंग: चीन(China) की सेना में बीते तीन वर्षों के भीतर जो बदलाव सामने आए हैं, वे आधुनिक इतिहास में असाधारण माने जा रहे हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग(Xi Jinping) के नेतृत्व में शीर्ष सैन्य ढांचे में बड़े पैमाने पर अधिकारियों को हटाया गया या वे अचानक सार्वजनिक जीवन से गायब हो गए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सत्ता संतुलन से जुड़ा है। इससे चीन की सैन्य तैयारी और आंतरिक राजनीति दोनों पर असर पड़ा है

न्यूयॉर्क टाइम्स की हालिया जांच में सामने आया कि 2023 की शुरुआत तक सक्रिय रहे करीब 30 जनरल और एडमिरल में से अब सिर्फ सात ही सार्वजनिक रूप से दिख रहे हैं। बीजिंग(Beijing) के रक्षा हलकों में इस घटनाक्रम को अभूतपूर्व माना जा रहा है। हालांकि इन हटावों के पीछे आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं बताए गए, लेकिन संकेत सत्ता के केंद्रीकरण की ओर इशारा करते हैं।

सैन्य ढांचे में बड़ा खालीपन

इन बर्खास्तगियों से दुनिया की दूसरी सबसे शक्तिशाली(Xi Jinping) सेना के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व का बड़ा खालीपन पैदा हुआ है। कई महत्वपूर्ण विभाग और थिएटर कमांड लंबे समय से स्थायी प्रमुखों के बिना काम कर रहे हैं। इससे निर्णय प्रक्रिया और रणनीतिक निरंतरता पर सवाल उठे हैं। अमेरिकी खुफिया विश्लेषकों का कहना है कि इससे सैन्य समन्वय प्रभावित हो सकता है।

2016 में शी जिनपिंग ने सेना को सात मिलिट्री रीजन से बदलकर पांच थिएटर कमांड में बांटा था। इसका मकसद अलग-अलग मोर्चों पर तेज और एकीकृत निर्णय लेना था। इसी ढांचे के तहत सेना, नौसेना, वायुसेना और मिसाइल फोर्स को एक कमान में लाया गया। इसलिए अब जब इन कमांड में बड़े पैमाने पर अधिकारी हटे हैं, तो असर व्यापक दिख रहा है।

थिएटर कमांड में सबसे ज्यादा असर

साउदर्न, वेस्टर्न और नॉर्दर्न थिएटर कमांड में सबसे ज्यादा जनरल हटाए गए हैं। सेंट्रल थिएटर कमांड अपेक्षाकृत कम प्रभावित रहा है। ये सभी इकाइयां सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के अधीन काम करती हैं। इस कमीशन के छह में से पांच शीर्ष जनरल अब अपने पदों पर नहीं हैं।

2022 में इन्हीं जनरलों को शी जिनपिंग(Xi Jinping) ने खुद नियुक्त किया था। अब केवल झांग शेंगमिन ही बचे हैं, जो सफाई अभियान की निगरानी कर रहे हैं। हाल में वाइस चेयरमैन झांग यूक्सिया और जनरल लियू झेनली को एक साथ हटाया गया, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल मचा दी।

भरोसेमंद रहे लोग भी निशाने पर

झांग यूक्सिया वही अधिकारी थे, जिन्होंने 2023 में शी जिनपिंग को तीसरी बार राष्ट्रपति बनने में अहम भूमिका निभाई थी। उन पर कमीशन के भीतर गुटबाजी और अत्यधिक शक्ति केंद्रित करने के आरोप लगे। विशेषज्ञों के अनुसार वे जरूरत से ज्यादा प्रभावशाली हो गए थे, जिससे नेतृत्व को खतरा महसूस हुआ।

यह सफाई अभियान केवल थलसेना तक सीमित नहीं रहा। रॉकेट फोर्स और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी भी इसकी चपेट में आए हैं। सरकारी अखबार ने सैनिकों से अपील की है कि वे नेतृत्व के फैसलों का समर्थन करें। अखबार का दावा है कि यह अस्थायी कठिनाई है और अंततः सेना और मजबूत होगी।

सत्ता सफाई के पीछे असली वजह क्या मानी जा रही है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम(Xi Jinping) सत्ता को पूरी तरह केंद्रीकृत करने की रणनीति का हिस्सा है। शीर्ष सैन्य अधिकारियों की बढ़ती ताकत नेतृत्व के लिए जोखिम बन सकती थी। इसलिए भरोसेमंद माने जाने वाले लोगों को भी हटाया गया। इससे राष्ट्रपति की पकड़ और मजबूत हुई है।

इस घटनाक्रम का चीन की सैन्य क्षमता पर क्या असर पड़ेगा?

अल्पकाल में नेतृत्व की कमी से समन्वय प्रभावित हो सकता है। नई नियुक्तियों तक निर्णय प्रक्रिया धीमी रह सकती है। लेकिन सरकार का दावा है कि लंबे समय में इससे अनुशासन और नियंत्रण बढ़ेगा। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

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