बॉम्बे हाईकोर्ट ने हटाया स्टे, बैंक अब घोषित कर सकेंगे ‘फ्रॉड’
मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 23 फरवरी 2026 को रिलायंस ग्रुप (ADAG) के चेयरमैन अनिल अंबानी(Anil Ambani) को मिली राहत को रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद अब बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक और IDBI बैंक जैसे संस्थान अंबानी को ‘फ्रॉड’ (धोखाधड़ी करने वाला) कर्जदार घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया दोबारा शुरू कर पाएंगे। इससे पहले एक सिंगल बेंच ने इस कार्यवाही पर रोक लगा दी थी, लेकिन अब डिवीजन बेंच ने बैंकों की दलीलों को स्वीकार करते हुए जांच का रास्ता साफ कर दिया है।
₹40,000 करोड़ का कथित घोटाला और SIT जांच
यह पूरा मामला रिलायंस ADAG ग्रुप की कंपनियों से जुड़े ₹40,000 करोड़ के कथित बैंक फ्रॉड से संबंधित है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने एक फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर अंबानी(Anil Ambani) के खातों को ‘फ्रॉड’ श्रेणी में डाल दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसी महीने सुप्रीम कोर्ट ने जांच में देरी पर नाराजगी जताई थी और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया था। अनिल अंबानी को अब 26 फरवरी को ED के सामने पेश होना है।
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अंबानी का पक्ष और कानूनी सहयोग का भरोसा
अदालती कार्यवाही के बीच अनिल अंबानी ने स्पष्ट किया है कि वे जांच एजेंसियों (ED और CBI) के साथ पूरा सहयोग करेंगे। पिछले हफ्ते उन्होंने(Anil Ambani) कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि वे बिना अनुमति के देश छोड़कर बाहर नहीं जाएंगे और जुलाई 2025 से लगातार भारत में ही हैं। हालांकि, बैंकों का तर्क है कि फॉरेंसिक ऑडिट के आधार पर कड़ी कार्यवाही जरूरी है। अब सबकी नजरें 26 फरवरी को होने वाली उनकी पेशी और SIT की शुरुआती जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
बैंकों द्वारा किसी खाते को ‘फ्रॉड’ घोषित करने का क्या मतलब होता है?
जब बैंक किसी खाते को ‘फ्रॉड’ घोषित करते हैं, तो इसका मतलब है कि कर्जदार ने जानबूझकर फंड का दुरुपयोग या हेराफेरी की है। इसके बाद कर्जदार को भविष्य में किसी भी बैंक से लोन मिलने के रास्ते बंद हो जाते हैं और कानूनी कार्यवाही तेज हो जाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या कड़ा रुख अपनाया है?
सुप्रीम कोर्ट ने जांच में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं और इस ₹40,000 करोड़ के मामले की तेजी से जांच करने के लिए ED को एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने का निर्देश दिया है।
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