हैदराबाद/नई दिल्ली,। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की इजरायल यात्रा को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस (Congress) ने इस दौरे को भारत की पारंपरिक विदेश नीति से विचलन बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह कदम फिलिस्तीन के प्रति भारत के ऐतिहासिक समर्थन के विपरीत है, जबकि सरकार इसे रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक अवसर बता रही है।
ओवैसी का तीखा हमला
ओवैसी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (Social Media Munch X) पर लंबी पोस्ट जारी कर इजरायली नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं, उनके साथ इस समय निकटता दिखाना भारत की सैद्धांतिक स्थिति के खिलाफ है। ओवैसी ने आशंका जताई कि मध्य-पूर्व में हालात और बिगड़ सकते हैं तथा इस यात्रा के क्षेत्रीय प्रभाव दूरगामी हो सकते हैं।
कांग्रेस ने याद दिलाया ऐतिहासिक रुख
कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार को घेरा। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने भारत के ऐतिहासिक रुख का हवाला देते हुए कहा कि देश ने हमेशा फिलिस्तीन के अधिकारों का समर्थन किया है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के दौर का उल्लेख करते हुए गाजा में संयुक्त राष्ट्र मिशन में भारत की भागीदारी की याद दिलाई। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री इजरायल की संसद को संबोधित करते समय गाजा में मारे गए निर्दोष लोगों के लिए न्याय की मांग करेंगे और भारत की शांति व न्याय की परंपरा को दोहराएंगे।
इजरायल में भव्य स्वागत, आतंकवाद पर दोहराया रुख
इधर, प्रधानमंत्री मोदी का इजरायल पहुंचने पर बेन गुरियन हवाई अड्डे पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने इजरायली संसद ‘नेसेट’ को संबोधित करते हुए गाजा शांति पहल को क्षेत्र में स्थायी समाधान का मार्ग बताया। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ इजरायल के साथ एकजुटता जताते हुए कहा कि भारत शून्य सहिष्णुता की नीति पर अडिग है और वैश्विक समुदाय को दोहरे मापदंड छोड़कर सामूहिक प्रयास करने चाहिए।
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सरकार बनाम विपक्ष : अलग-अलग नजरिया
जहां केंद्र सरकार इस यात्रा को कूटनीतिक सफलता और रणनीतिक साझेदारी की मजबूती के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे भारत की गुटनिरपेक्ष विरासत और फिलिस्तीन समर्थक छवि से विचलन बता रहा है। अब देखना होगा कि इस यात्रा के कूटनीतिक परिणाम क्या सामने आते हैं और घरेलू राजनीति में यह बहस किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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