यूरेनियम आपूर्ति और रक्षा सहयोग का नया अध्याय
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई(India-Canada) पीएम मार्क कार्नी के बीच हैदराबाद हाउस(Hyderabad House) में हुई मुलाकात के बाद भारत को यूरेनियम आपूर्ति के लिए 10 साल का ऐतिहासिक समझौता हुआ है। लगभग 3 अरब डॉलर की यह डील भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक है, और इस समझौते से भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को स्वच्छ और सुरक्षित तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही दोनों देश छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) की तकनीक पर भी सहयोग करेंगे।
रक्षा संवाद और रणनीतिक साझेदारी
दोनों देशों ने अपने रिश्तों को केवल व्यापार तक सीमित न रखते हुए ‘भारत-कनाडा रक्षा संवाद'(India-Canada) स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह कदम रक्षा उद्योगों, समुद्री सुरक्षा और सैन्य आदान-प्रदान में आपसी विश्वास को दर्शाता है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद और कट्टरपंथ जैसी साझा चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों का सहयोग वैश्विक शांति के लिए आवश्यक है। यह पहल पिछले कुछ वर्षों के कूटनीतिक तनाव के बाद रक्षा क्षेत्र में एक नई और परिपक्व शुरुआत है।
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आर्थिक निवेश और प्रवासियों का योगदान
कनाडा ने भारत में अब तक $100 बिलियन (लगभग 8 लाख करोड़ रुपये) से अधिक का निवेश किया है, जिसे अब और बढ़ाने की योजना है। भारत(India-Canada) में वर्तमान में 600 से अधिक कनाडाई कंपनियां सक्रिय हैं। इसके अलावा, कनाडा की 23% आबादी विदेशी मूल की है, जिसमें 16 लाख भारतीय मूल के लोग शामिल हैं। पीएम मार्क कार्नी का यह दौरा निज्जर विवाद के बाद खराब हुए रिश्तों को पटरी पर लाने और आर्थिक व सामाजिक संबंधों को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत और कनाडा के बीच हुए 10 साल के यूरेनियम समझौते का महत्व क्या है?
भारत अपनी बिजली जरूरतों के लिए परमाणु ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ा रहा है। कनाडा से यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित होने से भारत के परमाणु रिएक्टरों को निरंतर ईंधन मिलेगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। यह 3 अरब डॉलर का समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक विश्वास को भी बढ़ाता है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत और कनाडा के रिश्तों में क्या चुनौतियाँ रही हैं?
साल 2023 में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के आरोपों के बाद दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में भारी गिरावट आई थी। दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था और वीजा सेवाएं भी प्रभावित हुई थीं। हालांकि, कनाडाई नेतृत्व में बदलाव (मार्क कार्नी के आने) के बाद अब दोनों देश इन विवादों को पीछे छोड़कर आर्थिक और सामरिक सहयोग पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
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