5 Heroes: टीम इंडिया के ‘पंच रत्न’: फाइनल की राह बनाने वाले 5 हीरो

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संजू और ईशान का बल्लेबाजी में धमाका

स्पोर्ट्स डेस्क: भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ संजू सैमसन और ईशान किशन(5 Heroes) रहे हैं। संजू सैमसन ने सेमीफाइनल में 89 रनों की विस्फोटक(Explosive) पारी खेलकर और वेस्टइंडीज के खिलाफ ‘करो या मरो’ मैच में नाबाद 97 रन बनाकर लगातार दो ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ अवॉर्ड जीते। वहीं, ईशान किशन ने पाकिस्तान के खिलाफ दबाव में 77 रनों की पारी खेलकर टीम को संभाला। ईशान वर्तमान में 263 रनों के साथ भारत के टॉप स्कोरर हैं, जबकि संजू की फॉर्म ने टॉप ऑर्डर को स्थिरता और आक्रामकता दोनों प्रदान की है

बुमराह और हार्दिक का जादुई स्पेल

गेंदबाजी और ऑलराउंड प्रदर्शन(All Round Performance) में जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या(5 Heroes) ने निर्णायक भूमिका निभाई। बुमराह ने सेमीफाइनल के नाजुक मोड़ पर किफायती गेंदबाजी कर इंग्लैंड पर दबाव बनाया और टूर्नामेंट में अब तक 10 विकेट झटके हैं। दूसरी ओर, हार्दिक पंड्या ने न केवल 199 रन बनाए हैं, बल्कि 8 विकेट लेकर खुद को सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर साबित किया है। सेमीफाइनल में उनके द्वारा फेंका गया 19वां ओवर मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जिसने इंग्लैंड की जीत की उम्मीदों को खत्म कर दिया।

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वरुण चक्रवर्ती की फिरकी का कमाल

मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती इस वर्ल्ड कप में भारत के सबसे सफल गेंदबाज बनकर उभरे हैं। उन्होंने 8 मैचों में सर्वाधिक 13 विकेट लिए हैं, जिसमें नामीबिया और नीदरलैंड के खिलाफ लिए गए 3-3 विकेट शामिल हैं। हालांकि नॉकआउट में वे थोड़े महंगे साबित हुए, लेकिन ग्रुप स्टेज और सुपर-8 में उनकी कसी हुई गेंदबाजी ने विपक्षी टीमों को बड़े स्कोर बनाने से रोका। उनकी शुरुआती सफलताओं ने ही भारत के लिए जीत की नींव तैयार की थी।

संजू सैमसन को लगातार दो मैचों में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ क्यों चुना गया?

संजू सैमसन ने वेस्टइंडीज के खिलाफ महत्वपूर्ण मैच में नाबाद 97 रन बनाए और फिर इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में 89 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली। इन दोनों पारियों ने भारत को संकट से उबारा और जीत सुनिश्चित की, जिसके कारण उन्हें यह सम्मान मिला।

सेमीफाइनल में जसप्रीत बुमराह की गेंदबाजी ने मैच का रुख कैसे बदला?

जब इंग्लैंड को 18 गेंदों में 45 रन चाहिए थे और जैकब बेथेल क्रीज पर जमे हुए थे, तब बुमराह ने अपने ओवर में केवल 6 रन दिए। इस कसी हुई गेंदबाजी ने बल्लेबाजों पर मानसिक दबाव बनाया, जिसका फायदा अगले ओवर में हार्दिक पंड्या को विकेट के रूप में मिला।

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