वॉशिंगटन,। सामरिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने इस जलमार्ग में तेल की आवाजाही रोकने की कोई भी कोशिश की, तो अमेरिका (America) उस पर अब तक के सबसे भीषण प्रहार से 20 गुना ज्यादा खतरनाक हमला करेगा। ट्रंप का यह तीखा बयान ईरान के उस हालिया दावे के बाद आया है जिसमें उसने इस रास्ते को पूरी तरह बंद करने और यहां से गुजरने वाले जहाजों को आग के हवाले करने की धमकी दी थी।
ईरान का दावा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद
ईरान के पैरामिलिट्री रिवॉल्यूशनरी गार्ड के ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जब्बारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब बंद हो चुका है और इस क्षेत्र में किसी भी पोत को प्रवेश नहीं करना चाहिए।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इस तनातनी का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर दिखने लगा है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित इस संकरे रास्ते पर फिलहाल आवागमन ठप है, जिसके कारण दोनों छोर पर 700 से अधिक तेल टैंकर फंसे हुए हैं।
भारत सहित कई देशों की बढ़ी चिंता
भारत जैसे प्रमुख आयातक देशों के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है और खबरें हैं कि नई दिल्ली अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने के विकल्पों पर विचार कर रही है।
ट्रंप की सख्त चेतावनी
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यदि ईरान ने जलडमरूमध्य में बाधा डाली, तो अमेरिका उनके उन ठिकानों को नष्ट कर देगा जिससे एक राष्ट्र के रूप में ईरान का दोबारा खड़ा होना नामुमकिन हो जाएगा। उन्होंने इसे चीन और उन तमाम देशों के लिए एक उपहार बताया जो इस मार्ग का भारी इस्तेमाल करते हैं।
“मौत, आग और कहर बरसेगा”
ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि उन पर मौत, आग और कहर बरसेगा, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह प्रार्थना करते हैं कि ऐसी नौबत न आए।
दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऑयल ट्रांजिट चोकपॉइंट है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह रास्ता महज 33 किलोमीटर चौड़ा है, लेकिन वैश्विक ईंधन आपूर्ति की लाइफलाइन है।
रोजाना गुजरता है करोड़ों बैरल तेल
आंकड़े बताते हैं कि रोजाना करीब 1.98 करोड़ बैरल कच्चा तेल और भारी मात्रा में लिक्विफैड नेचुरल गैस इसी मार्ग से गुजरती है। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक जैसे बड़े तेल उत्पादक देश अपने निर्यात के लिए पूरी तरह इसी रास्ते पर निर्भर हैं।
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बढ़ सकता है वैश्विक ऊर्जा संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गतिरोध लंबा खिंचा, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने का खतरा है।
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