साइबर क्राइम रोकथाम के लिए वॉलंटियर कार्यक्रम का आयोजन
हैदराबाद। हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वी.सी. सज्जनार (V.C. Sajjanar) ने नागरिकों से अपील की है कि वे साइबर अपराधों के शिकार हो रहे लोगों की मदद करें और समाज में साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। हैदराबाद के बंजारा हिल्स में टीजीआईसीसीसी ऑडिटोरियम में ‘साइबर सिंबा’ वॉलंटियर ओरीएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कमिश्नर सज्जनर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों को रोकने में जनता की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से ‘जागरूक हैदराबाद – सुरक्षित हैदराबाद’ अभियान के तहत ‘साइबर सिंबा’ वॉलंटियर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। कमिश्नर ने सुझाव दिया कि वाट्सऐप ग्रुप में केवल ‘गुड मॉर्निंग’ (‘Good Morning’) और ‘गुड नाइट’ संदेश साझा करने तक सीमित न रहकर, साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूकता संदेश साझा किए जाएं।
अब तक 1,717 वॉलंटियर हो चुके हैं शामिल
उन्होंने बताया कि नवंबर 2025 में शुरू हुए इस कार्यक्रम में अब तक 1,717 वॉलंटियर शामिल हो चुके हैं और 5,118 डोर-टू-डोर अभियान के माध्यम से लगभग दो लाख लोगों को जागरूक किया जा चुका है। कमिश्नर ने चेताया कि डिजिटल धोखाधड़ी, ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर साइबर अपराधी अब सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और शिक्षित लोगों को भी ठगा रहे हैं। उन्होंने युवाओं और महिलाओं से कहा कि वे सोशल मीडिया पर अनजान व्यक्तियों के प्रति अत्यंत सतर्क रहें। साइबर अपराध के शुरुआती घंटे को ‘गोल्डन ऑवर’ बताते हुए उन्होंने कहा कि इस समय में 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने से धन वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, पुलिस स्टेशन जाने की आवश्यकता के बिना घर बैठे शिकायत दर्ज करने के लिए ‘सी-मित्र’ सेवा भी उपलब्ध कराई गई है।

रोजाना औसतन 80 शिकायतें आती थीं
कमिश्नर ने कहा कि इस पहल से पहले रोजाना औसतन 80 शिकायतें आती थीं, जो अब घटकर 60 रह गई हैं, और यह लोगों में बढ़ती जागरूकता का संकेत है। उन्होंने इस अभियान को पूरे देश में फैलाने की इच्छा जताई और हैदराबाद को साइबर अपराध रहित शहर बनाने का लक्ष्य साझा किया। कार्यक्रम में अतिरिक्त सीपी (क्राइम एवं एस.आई.टी) एम. श्रीनिवास, डीसीपी ए. अरविंद बाबू, एस. चैतन्य कुमार, जी. चंद्रमोहन, बी. राजेश, श्रीमती लावण्या नायक जादव सहित अन्य पुलिस अधिकारियों और वॉलंटियरों ने भाग लिया।
साइबर क्राइम को कैसे रोका जा सकता है?
ऑनलाइन अपराधों से बचने के लिए इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग करना बहुत जरूरी होता है। मजबूत पासवर्ड रखना, अनजान लिंक या ई-मेल पर क्लिक न करना, अपनी व्यक्तिगत जानकारी किसी से साझा न करना और भरोसेमंद वेबसाइटों का ही उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा मोबाइल और कंप्यूटर में एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर रखना तथा संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत संबंधित एजेंसियों को शिकायत करना भी साइबर अपराध को रोकने में मदद करता है।
भारत में साइबर सुरक्षा से संबंधित संगठन कौन सा है?
भारत में साइबर सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख सरकारी संस्था Indian Computer Emergency Response Team है। यह संगठन देश में साइबर हमलों और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी करता है। इसके अलावा National Cyber Crime Reporting Portal के माध्यम से लोग साइबर अपराध की शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं। ये संस्थाएँ साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने और लोगों को जागरूक करने का काम करती हैं।
साइबर क्राइम के जनक कौन थे?
साइबर अपराध का कोई एक आधिकारिक “जनक” नहीं माना जाता, क्योंकि यह इंटरनेट और कंप्यूटर तकनीक के विकास के साथ धीरे-धीरे बढ़ा। शुरुआती समय में कंप्यूटर हैकिंग से जुड़े मामलों के कारण यह शब्द प्रचलन में आया। 1980 और 1990 के दशक में इंटरनेट के फैलने के साथ साइबर अपराधों में वृद्धि हुई और कई देशों ने इसके खिलाफ कानून बनाए। इसलिए इसे किसी एक व्यक्ति से जोड़कर नहीं देखा जाता।
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