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IRAN- रूस-चीन की तकनीक से मिली ताकत, ईरानी मिसाइलें लगा रहीं सटीक निशानें

Anuj Kumar
Anuj Kumar
IRAN- रूस-चीन की तकनीक से मिली ताकत, ईरानी मिसाइलें लगा रहीं सटीक निशानें

ईरान की सैन्य ताकत में हाल के वर्षों में तेजी से इजाफा हुआ है। खासकर मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रगति के पीछे रूस और चीन से मिली तकनीकी मदद और सहयोग की अहम भूमिका रही है। इसी के चलते अब ईरानी मिसाइलें (Irani Missile) पहले के मुकाबले कहीं अधिक सटीक और प्रभावी हो गई हैं।

तकनीकी सहयोग से बढ़ी क्षमता

रूस और चीन से मिले उन्नत गाइडेंस सिस्टम (Guidance System) सैटेलाइट नेविगेशन और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के कारण ईरान की मिसाइलों की मारक क्षमता और सटीकता दोनों में सुधार हुआ है। पहले जहां लक्ष्य भटकने की संभावना अधिक रहती थी, वहीं अब मिसाइलें अपने निशाने पर ज्यादा सटीकता से वार कर रही हैं।

मिसाइल सिस्टम में आधुनिक बदलाव

ईरान ने अपने बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल सिस्टम (Cruse Missile System) में कई बड़े बदलाव किए हैं। नई तकनीकों के इस्तेमाल से मिसाइलें लंबी दूरी तक मार करने के साथ-साथ दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को भी चकमा देने में सक्षम हो गई हैं। इससे उसकी सैन्य रणनीति और भी मजबूत हुई है।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर

ईरान की बढ़ती मिसाइल क्षमता का असर मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर भी पड़ रहा है। कई देशों ने इसे लेकर चिंता जताई है और इसे क्षेत्र में शक्ति संतुलन के लिए चुनौती माना जा रहा है। वहीं, ईरान का कहना है कि उसकी यह ताकत केवल आत्मरक्षा के लिए है।

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वैश्विक स्तर पर बढ़ी चर्चा

ईरान की मिसाइल क्षमताओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस तेज हो गई है। कई पश्चिमी देश इस पर निगरानी बढ़ाने और प्रतिबंधों की बात कर रहे हैं, जबकि ईरान अपने रक्षा कार्यक्रम को जारी रखने पर अड़ा हुआ है।

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