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Petrol: पेट्रोल-डीजल पर टैक्स राहत

Dhanarekha
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Petrol: पेट्रोल-डीजल पर टैक्स राहत

वैश्विक संकट के बीच सरकार का बड़ा कदम

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में ₹10-₹10 प्रति लीटर की भारी कटौती की है। इस कटौती के बाद पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 से घटकर ₹3 और डीजल पर शून्य हो गई है। हालांकि, इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि कल से पंप पर कीमतें ₹10 कम हो जाएंगी। मुख्य उद्देश्य तेल कंपनियों के उस घाटे की भरपाई करना है जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के $100 प्रति बैरल पार कर जाने के कारण हो रहा था। यह कदम कीमतों को मौजूदा स्तर पर स्थिर रखने के लिए उठाया गया है

कंपनियों का घाटा और अंतरराष्ट्रीय दबाव
ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे भारतीय तेल(Indian Oil) कंपनियों को प्रति लीटर ₹24 से ₹30 तक का नुकसान उठाना पड़ रहा था। यदि सरकार टैक्स कम नहीं करती, तो कंपनियां अपना घाटा कम करने के लिए कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी कर सकती थीं। प्राइवेट प्लेयर जैसे नायरा एनर्जी ने पहले ही कीमतों में इजाफा शुरू कर दिया था, जिससे सरकारी कंपनियों पर भी दबाव बढ़ रहा था। एक्साइज ड्यूटी में यह बदलाव कंपनियों के ‘मार्केटिंग मार्जिन’ को संभालने में मदद करेगा।

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आगामी चुनौतियां और सरकार की तैयारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ इस युद्ध स्तर के संकट पर चर्चा करेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और भारत के पास 60 दिनों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। भविष्य में कीमतें कम होंगी या नहीं, यह पूरी तरह से पश्चिम एशिया के हालातों और कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों पर निर्भर करेगा। यदि राज्य सरकारें भी अपने वैट (VAT) में कटौती करती हैं, तभी उपभोक्ताओं को सीधी राहत मिल पाएगी।

सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाई है, फिर भी पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं हो रहा?
तेल कंपनियां वर्तमान में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही हैं। सरकार द्वारा दी गई ₹10 की टैक्स राहत का उपयोग कंपनियां अपने पुराने और वर्तमान घाटे को पाटने के लिए करेंगी, ताकि उन्हें जनता के लिए कीमतें और न बढ़ानी पड़ें।

क्या भविष्य में ईंधन के दाम और बढ़ सकते हैं?
यह पूरी तरह वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर है। अगर ईरान-इजराइल युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें $110-120 के पार जाती हैं, तो एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बावजूद कंपनियां दाम बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं।

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