33% दाम बढ़ने के बावजूद एडवांस बुकिंग फुल
न्यूयॉर्क: अमेरिका (America) में भारतीय आमों के प्रति दीवानगी इस हद तक बढ़ गई है कि लोग 10-12 आमों के एक बॉक्स के लिए ₹5,600 तक खर्च कर रहे हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 33% अधिक है। कीमतों में इस उछाल का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते तेल के दामों में वृद्धि और शिपमेंट का महंगा होना है। भारी मांग को देखते हुए ‘जीजी मैंगो’ जैसी कंपनियां ₹94,000 में पूरे सीजन का ‘मैंगो पास’ भी ऑफर कर रही हैं। लोग मेक्सिकन आमों (Mexican Mangoes) के बजाय भारतीय अल्फांसो, केसर, चौसा और लंगड़ा को उनके अनोखे स्वाद और मिठास के कारण प्राथमिकता दे रहे हैं।
दशकों का प्रतिबंध और ऐतिहासिक समझौता
भारत(India) दुनिया की आधी मैंगो सप्लाई करता है, लेकिन अमेरिकी बाजारों तक पहुँचने का इसका सफर आसान नहीं था। दशकों तक अमेरिका में भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगा रहा क्योंकि कीड़े मारने के लिए इस्तेमाल होने वाला ‘हॉट-वॉटर ट्रीटमेंट’ भारतीय आमों की गुणवत्ता खराब कर देता था। साल 2006 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते और ‘गामा रेडिएशन’ तकनीक को अपनाने के बाद, 2007 में भारतीय आमों के लिए अमेरिका के दरवाजे खुले।
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वफादार ग्राहक और भविष्य की संभावनाएं
खास बात यह है कि भारतीय प्रवासियों से ज्यादा अब अमेरिकी नागरिक इन आमों के वफादार ग्राहक बन रहे हैं। वे आमों की खेप वाली फ्लाइट्स को ऑनलाइन ट्रैक तक कर रहे हैं। भारतीय आमों की लोकप्रियता को देखते हुए अब वॉलमार्ट और कोस्टको जैसे बड़े रिटेल स्टोर भी इन्हें बेचने की तैयारी कर रहे हैं। दक्षिण भारत का बंगनपल्ली हो या उत्तर भारत का लंगड़ा, भारतीय आमों ने अपने स्वाद के दम पर अमेरिकी फल बाजार में एक प्रीमियम पहचान बना ली है।
अमेरिका में भारतीय आमों की कीमतों में पिछले साल की तुलना में कितनी वृद्धि हुई है और इसका मुख्य कारण क्या है?
भारतीय आमों की कीमतों में पिछले साल की तुलना में लगभग 33% की वृद्धि हुई है। एक बॉक्स की कीमत ₹4,200 से बढ़कर ₹5,600 तक पहुँच गई है। इसका मुख्य कारण ईरान युद्ध के बाद तेल के दामों में बढ़ोतरी और शिपमेंट खर्च का बढ़ना है।
यहां के आमों पर अमेरिका में प्रतिबंध कब हटा और इसमें किस तकनीक ने मदद की?
भारतीय आमों पर से प्रतिबंध साल 2007 में हटा। इसमें ‘गामा रेडिएशन’ तकनीक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो आमों को खराब किए बिना कीटाणु मुक्त करने में सक्षम है।
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