Global Mobility: ग्लोबल मोबिलिटी रिपोर्ट 2026: ईवी से दुनिया का मोहभंग

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ऑटो सेक्टर में बढ़ा चीनी कारों का बहिष्कार

मुंबई: इप्सॉस की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) के प्रति विकसित देशों का उत्साह(Global Mobility) कम हो रहा है। जहाँ फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका जैसे देश अब ईवी से दूरी बना रहे हैं, वहीं इंडोनेशिया और मेक्सिको (60%) जैसे उभरते बाजार इसे अपनाने में सबसे आगे हैं। जापान में ईवी की लोकप्रियता में -28% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके विपरीत, भारत में ईवी की अपील 40% बनी हुई है, जो ग्लोबल औसत के करीब है और पश्चिमी देशों की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में है

सेल्फ-ड्राइविंग तकनीक: भारतीयों का भरोसा और वैश्विक डर

सेल्फ-ड्राइविंग या स्वायत्त कारों को लेकर दुनिया भर में असुरक्षा की भावना है, विशेषकर फ्रांस और अमेरिका में लोग इसे जोखिम भरा मानते हैं। हालांकि, भारतीय(Indian) इस मामले में काफी सकारात्मक हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 47% भारतीय इस तकनीक को सुरक्षित मानते हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर केवल 36% लोग ही ऐसा सोचते हैं। साथ ही, परिवहन की पसंद के मामले में जहाँ 65% अमेरिकी कार को अनिवार्य मानते हैं, वहीं 62% भारतीय आज भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट को अपनी पहली पसंद बताते हैं।

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चीनी कारों का बॉयकॉट और भारतीय ब्रांड्स के लिए अवसर

वैश्विक स्तर पर चीनी कारों के प्रति अविश्वास तेज़ी से बढ़ा है। जापान में 90% लोगों ने चीनी कार खरीदने से साफ़ इनकार कर दिया है, वहीं दक्षिण कोरिया में भी ऐसी ही भावना प्रबल है। चीन की कारों का ग्लोबल बॉयकॉट रेट 41% तक पहुँच गया है। बाजार के इस माहौल में टाटा और महिंद्रा जैसे भारतीय ब्रांड्स के लिए एशियाई बाजारों में विस्तार करने का बड़ा मौका है। भारत का बाजार भी किसी खास ब्रांड के लिए सीमित नहीं है, यहाँ पारंपरिक ऑटोमेकर्स के साथ-साथ टेक कंपनियों के लिए भी समान संभावनाएं मौजूद हैं।

इप्सॉस रिपोर्ट के अनुसार कौन से देश ईवी अपनाने में सबसे आगे और कौन सबसे पीछे हैं?

रिपोर्ट के अनुसार इंडोनेशिया (60%), मेक्सिको (60%) और चिली (57%) ईवी अपनाने में सबसे आगे हैं। वहीं जापान (-28%) और अन्य विकसित देश जैसे फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका इस दौड़ में पीछे छूट रहे हैं।

ग्लोबल मोबिलिटी रिपोर्ट में चीनी कारों के प्रति दुनिया का क्या रुख है?

दुनिया भर में चीनी कारों के प्रति भारी अविश्वास है। चीन की कारों का ग्लोबल बॉयकॉट रेट 41% है। जापान में 90% लोग चीनी कार नहीं खरीदना चाहते, जबकि दक्षिण कोरिया और कनाडा जैसे देशों में भी विदेशी ब्रांड्स के प्रति विरोध बढ़ा है।

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Dhanarekha

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