पश्चिम में गिरावट, देश में मजबूती
नई दिल्ली: भारत का रिटेल सेक्टर इन दिनों मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है, जबकि पश्चिमी देशों में शॉपिंग मॉल बंद होने की खबरें सामने आ रही हैं। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म एनारॉक(Anarock) की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका(USA) में साल 2020 के बाद करीब 1200 मॉल स्टोर बंद हो चुके हैं। इसके उलट भारत में उपभोक्ता खर्च और निवेशकों की दिलचस्पी ने रिटेल बाजार को नई जान दी है।
एनारॉक(Anarock) के अनुसार, भारत(India) में मजबूत खपत रुझान और विदेशी ब्रांड्स की बढ़ती मौजूदगी से रिटेल सेक्टर तेजी से उभर रहा है। इसी वजह से अगले तीन सालों में भारतीय शॉपिंग मॉल में 3.5 अरब डॉलर से अधिक निवेश आने की संभावना जताई गई है। यह रुझान दिखाता है कि वैश्विक मंदी के बावजूद भारत निवेशकों के लिए आकर्षक बना हुआ है।
भारत में रिटेल को क्यों मिल रही बढ़त
भारत में रिटेल सेक्टर की अपील के पीछे सबसे बड़ा कारण युवा आबादी और संगठित रिटेल की सीमित उपलब्धता है। अमेरिका और चीन जैसे बड़े बाजारों की तुलना में भारत में प्रति व्यक्ति रिटेल स्पेस काफी कम है। यही कमी मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा कर रही है, जो निवेश के लिए अवसर बन रही है।
इसके अलावा पिछले एक दशक में देश की प्रति व्यक्ति आय लगभग दोगुनी हुई है। नतीजतन उपभोक्ता खर्च करने के लिए ज्यादा तैयार हैं। विदेशी ब्रांड्स इसे एक बड़े विस्तार अवसर के रूप में देख रहे हैं और प्रीमियम मॉल में जगह पाने की होड़ लगी हुई है।
मॉल अब केवल खरीदारी की जगह नहीं
इस तेजी का असर शॉपिंग मॉल के प्रदर्शन पर साफ दिखता है। प्रीमियम मॉल 95 से 100 प्रतिशत तक भरे हुए हैं और किराए महामारी से पहले के स्तर को पार कर चुके हैं। डेवलपर्स के लिए लीजिंग की रफ्तार निर्माण से तेज हो गई है, जो बाजार की मजबूती का संकेत है।
अब मॉल सिर्फ खरीदारी तक सीमित नहीं रहे। मनोरंजन, फूड कोर्ट और सामाजिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में वे लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। वीकेंड पर 40,000 से ज्यादा लोग मॉल का रुख कर रहे हैं, जिससे फुटफॉल लगातार ऊंचा बना हुआ है।
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ई-कॉमर्स के बीच फिजिकल रिटेल मजबूत
ई-कॉमर्स के बढ़ते प्रभाव के बावजूद भारतीय फिजिकल रिटेल मजबूत बना हुआ है। भारत में ऑनलाइन रिटेल की हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत है, जो पश्चिमी देशों से काफी कम है। इससे ऑफलाइन स्टोर्स को डिजिटल चैनलों के साथ मिलकर काम करने का मौका मिल रहा है।
एनारॉक(Anarock) का अनुमान है कि साल 2030 तक भारत 6 ट्रिलियन डॉलर की खपत वाली अर्थव्यवस्था बन सकता है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय खुदरा विक्रेताओं और निवेशकों के लिए भारत को दीर्घकालिक विकास बाजार के रूप में स्थापित करती है।
पश्चिमी देशों में मॉल क्यों बंद हो रहे हैं
ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन से स्टोर फुटफॉल घटा है। उच्च संचालन लागत ने कई मॉल को घाटे में डाल दिया। खपत पैटर्न में बदलाव से रिटेल मॉडल कमजोर पड़ा।
भारत में निवेशकों का भरोसा क्यों बढ़ा है
युवा आबादी और बढ़ती आय ने मांग को मजबूत किया है। संगठित रिटेल की कमी से विस्तार के मौके बने हैं। anarock-the-new-face-of-retail-in-indiaमॉल का बहुउपयोगी स्वरूप निवेश को सुरक्षित बना रहा है।
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