Bikaji Foods: बीकाजी फूड्स के संस्थापक शिवरतन अग्रवाल का निधन: एक युग का अंत

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चेन्नई में ली अंतिम सांस

नई दिल्ली: बीकाजी ब्रांड(Bikaji Foods) के सीएमडी और भारतीय स्नैक उद्योग के दिग्गज शिवरतन अग्रवाल (74) का गुरुवार सुबह चेन्नई में निधन हो गया। वे अपनी पत्नी के हार्ट बायपास ऑपरेशन के बाद उनकी देखभाल के लिए चेन्नई(Chennai) के एक होटल में ठहरे हुए थे। गुरुवार सुबह अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें एक निजी अस्पताल(Hospital) ले जाया गया, जहाँ उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से व्यापारिक जगत और उनके गृह नगर बीकानेर में शोक की लहर दौड़ गई है

बीकानेर से वैश्विक मंच तक का सफर

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शिवरतन अग्रवाल ने 1986 में अपने पारिवारिक व्यवसाय से अलग होकर अपनी अलग पहचान बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने ‘शिवदीप फूड्स प्रोडक्ट्स’ के नाम से छोटे स्तर पर भुजिया बनाने का काम शुरू किया और बाद में इसे बीकानेर के संस्थापक राव बीका के नाम पर ‘बीकाजी’ ब्रांड का नाम दिया। केवल 8वीं तक पढ़े होने के बावजूद, उन्होंने अपने दूरदर्शी विजन से भुजिया बनाने की पारंपरिक हस्तकला को मशीनीकृत किया, जिससे बीकाजी देश का पहला ऐसा ब्रांड बना जिसने मशीनों के जरिए भुजिया का उत्पादन कर उसकी क्वालिटी और उत्पादकता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाया।

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व्यावसायिक प्रभाव और अंतिम संस्कार की तैयारी

शिवरतन अग्रवाल के निधन के बाद बीकानेर स्थित उनकी फैक्ट्रियों (करणी और बीछवाल इंडस्ट्रियल एरिया) में शोक स्वरूप आज प्रोडक्शन और सप्लाई को पूरी तरह रोक दिया गया है। गौरतलब है कि इन फैक्ट्रियों में रोजाना लगभग 800 टन खाद्य उत्पादों का निर्माण होता है। कंपनी और परिवार ने जानकारी दी है कि दिल्ली समेत देशभर से परिजन आज शाम तक बीकानेर पहुँच जाएंगे और शुक्रवार सुबह उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। वर्ष 2022 में शेयर बाजार में लिस्ट हुई बीकाजी आज एक वैश्विक फूड ब्रांड बन चुकी है, जिसका श्रेय पूर्णतः उनके नवाचारी दृष्टिकोण को जाता है।

उन्हाेंने बीकाजी ब्रांड की शुरुआत क्यों की थी?

शिवरतन अग्रवाल भारतीय स्वादों को विश्व स्तर पर पहचान दिलाना चाहते थे। वे एक ऐसा ब्रांड नाम चाहते थे जो यादगार हो और भारतीय संस्कृति से जुड़ा हो, इसलिए उन्होंने बीकानेर के संस्थापक राव बीका के नाम पर ‘बीकाजी’ नाम चुना।

बीकाजी ब्रांड की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या मानी जाती है?

बीकाजी की सबसे बड़ी उपलब्धि भुजिया बनाने की प्रक्रिया को पारंपरिक हस्तकला से मशीनीकृत करना था। वे भारत के पहले ऐसे ब्रांड बने जिसने मशीनों के जरिए भुजिया का उत्पादन किया, जिससे इसकी क्वालिटी और सप्लाई में क्रांतिकारी बदलाव आया।

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