किसानों की दुर्दशा: लागत से भी कम दाम
नई दिल्ली: देश के किसानों को अपनी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है। हाल ही में मध्य प्रदेश में प्याज किसानों द्वारा फसल सड़कों पर फेंकने की खबर के बाद, आंध्र प्रदेश(Andhra Pradesh) के केला(Banana) किसानों की भी ऐसी ही दयनीय स्थिति सामने आई है। किसानों को मजबूरन अपना केला केवल 50 पैसे प्रति किलोग्राम की दर से बेचना पड़ रहा है। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह कीमत माचिस की डिब्बी या एक बिस्किट से भी कम है, जबकि किसानों ने लाखों रुपये और महीनों की कड़ी मेहनत लगाई है। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं(Natural Disasters) के समय भी किसानों को कोई मदद नहीं मिली और किए गए वादे झूठे साबित हुए हैं।
पिछली सरकार के दौरान की व्यवस्था
जगन मोहन रेड्डी ने अपनी पोस्ट में पिछली सरकार के समय किसानों के लिए किए गए प्रयासों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार के समय, केले(Banana) का औसत दाम लगभग ₹25,000 प्रति टन (₹25 प्रति किलो) था। किसानों को बड़े नुकसान से बचाने और उन्हें उचित मूल्य दिलाने के लिए दिल्ली तक स्पेशल ट्रेनें चलाई जाती थीं। इसके अलावा, किसानों को कम दाम पर फसल बेचने की मजबूरी से बचाने के लिए पूरे राज्य में कोल्ड स्टोरेज (शीत भंडार गृह) भी बनवाए गए थे। उनका आरोप है कि वर्तमान सरकार ने किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया है और खेती को बर्बाद होते देख रही है।
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मंडियों और बाजारों में भारी अंतर
जहाँ एक ओर किसान 50 पैसे प्रति किलो के दाम पर अपनी फसल(Banana) बेचने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर देश की राजधानी दिल्ली के खुदरा बाज़ार में केले की कीमत आसमान छू रही है। ई-कॉमर्स साइट अमेजन के क्विक कॉमर्स सेक्शन में केले की कीमत जाँचने पर पता चला कि एक किलो केला ₹86 में बेचा जा रहा है, जो कि 28% डिस्काउंट के बाद की कीमत है। बिना डिस्काउंट के केले का वास्तविक दाम ₹120 प्रति किलो बताया जा रहा है। किसान को मिलने वाले दाम और उपभोक्ता द्वारा चुकाए जाने वाले दाम के बीच इतना बड़ा अंतर बिचौलियों और खराब सप्लाई चेन मैनेजमेंट की ओर इशारा करता है।
आंध्र प्रदेश के केला किसान किस मूल्य पर अपनी फसल बेचने को मजबूर हैं, और दिल्ली में केले का खुदरा दाम क्या है?
आंध्र प्रदेश के किसान अपनी फसल केवल 50 पैसे प्रति किलोग्राम के मूल्य पर बेचने को मजबूर हैं। वहीं, दिल्ली के खुदरा बाज़ार में एक किलो केले(Banana) का दाम डिस्काउंट के बाद ₹86 तक है।
पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने केले के दामों में गिरावट के लिए क्या मुख्य कारण बताए हैं?
उन्होंने बताया है कि किसानों को प्याज से लेकर टमाटर तक, किसी भी फसल का सही दाम नहीं मिल रहा है। इसके अलावा, प्राकृतिक आपदाओं के समय न तो फसल बीमा मिला, न ही कोई मदद। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को उनकी किस्मत पर छोड़ रही है।
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