वर्ल्ड बैंक से मिली नई राहत
नई दिल्ली: पाकिस्तान(Pakistan) की कमजोर अर्थव्यवस्था को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मदद मिली है। वर्ल्ड बैंक(World Bank) ने देश को 700 मिलियन डॉलर की नई वित्तीय सहायता मंजूर की है, जिसका उद्देश्य सरकारी संसाधनों को मजबूत करना और जरूरी सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाना है। यह सहायता ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक दबाव और नकदी संकट से जूझ रहा है।
यह फंडिंग एक बड़े बहु-चरणीय कार्यक्रम का हिस्सा है। रॉयटर्स(Reuters) की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी ढांचे के तहत आगे चलकर पाकिस्तान को और धन मिल सकता है। हालांकि देश को इससे पहले आईएमएफ से भी बड़ा पैकेज मिल चुका है, फिर भी चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
फंडिंग का ढांचा और उद्देश्य
यह 700 मिलियन डॉलर की राशि पब्लिक रिसोर्सेज फॉर इंक्लूसिव डेवलपमेंट कार्यक्रम के अंतर्गत दी गई है। इस पहल का मकसद सरकारी खर्च की क्षमता बढ़ाना और आम लोगों तक सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना है। कार्यक्रम को कई चरणों में लागू किया जाना है।
इस ढांचे के तहत पाकिस्तान को कुल 1.35 अरब डॉलर तक की सहायता मिल सकती है। पहले चरण की यह मंजूरी इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे केंद्र और प्रांतीय सरकारों के वित्तीय प्रबंधन को सहारा मिलेगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
कहां होगा धन का उपयोग
मंजूर की गई राशि में से 600 मिलियन डॉलर केंद्र सरकार के सुधार कार्यक्रमों पर खर्च किए जाएंगे। शेष 100 मिलियन डॉलर सिंध प्रांत की एक विशेष योजना के लिए निर्धारित किए गए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर सेवाओं को मजबूत किया जा सके।
इससे पहले विश्व बैंक ने पंजाब प्रांत में शिक्षा सुधारों के लिए अनुदान दिया था। इन फैसलों से संकेत मिलता है कि बहुपक्षीय संस्थाएं पाकिस्तान की संरचनात्मक कमजोरियों को दूर करने में सहयोग जारी रखे हुए हैं, इसलिए सरकार पर सुधारों को लागू करने का दबाव भी बना रहेगा।
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उधारी पर चलती व्यवस्था की चुनौतियां
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से कर्ज पर निर्भर रही है। शासन प्रणाली की कमजोरियां, बजट प्रक्रिया की अस्पष्टता और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसी समस्याएं निवेश को प्रभावित कर रही हैं। इन कारणों से राजस्व बढ़ाने की क्षमता सीमित बनी हुई है।
आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की रिपोर्टों में इन जोखिमों की ओर पहले भी इशारा किया गया है। हाल के कर्ज पैकेजों से विदेशी मुद्रा भंडार को कुछ राहत मिली है, लेकिन सार्वजनिक कर्ज का स्तर अब भी ऊंचा है। इसलिए दीर्घकालिक स्थिरता के लिए गहरे सुधार जरूरी माने जा रहे हैं।
नई सहायता का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा
इस फंड से सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ सकता है। इससे रोजमर्रा की सुविधाओं तक पहुंच आसान हो सकती है।
लगातार कर्ज लेने से क्या खतरे हैं
बार-बार उधारी से कर्ज बोझ बढ़ता है। अगर सुधार धीमे रहे तो आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। लंबे समय में इससे विकास की गति प्रभावित होने का जोखिम रहता है।
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