स्वास्थ्य और तकनीक: जीवन रक्षक दवाओं और गैजेट्स में राहत
नई दिल्ली: इस बजट(Budget) का सबसे मानवीय पहलू कैंसर की 17 लाइफ सेविंग दवाओं पर कस्टम ड्यूटी का पूरी तरह खत्म होना है। इससे उन परिवारों को बड़ी आर्थिक मदद मिलेगी जो इलाज के लिए महंगी विदेशी दवाओं पर निर्भर हैं। तकनीक के मोर्चे पर, सरकार ने माइक्रोवेव ओवन के पुर्जों और EV बैटरी बनाने वाली मशीनों पर टैक्स कम किया है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को घरेलू मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाना और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन (Electric Vehicles) को बढ़ावा देना है।
यात्रा और उपभोग: विदेश घूमना और विदेशी सामान हुआ सुलभ
पर्यटन और व्यक्तिगत उपभोग के शौकीनों के लिए यह बजट खुशखबरी लेकर आया है। विदेश यात्रा के टूर पैकेज पर लगने वाले TCS को 10 लाख की लिमिट हटाकर सीधा 2% कर दिया गया है, जो पहले 20% तक जाता था। साथ ही, विदेश से निजी इस्तेमाल(Budget) के लिए मंगवाए जाने वाले सामान पर भी टैक्स 20% से घटकर 10% रह गया है। हालांकि, शराब के शौकीनों के लिए बुरी खबर है क्योंकि शराब पर TCS 1% से बढ़ाकर 2% कर दिया गया है, जिससे इसकी कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है।
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शेयर बाजार और GST: ट्रेडिंग पर टैक्स की मार और नया स्लैब
ट्रेडर्स के लिए बाजार में दांव लगाना अब महंगा हो गया है। सरकार ने फ्यूचर ट्रेडिंग पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस पर इसे 0.15% कर दिया है। यह कदम सट्टेबाजी को कम करने और लंबी अवधि के निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए उठाया गया है। बजट में यह भी स्पष्ट किया गया कि अब देश में GST के पुराने(Budget) चार स्लैब की जगह केवल दो स्लैब (5% और 18%) प्रभावी हैं, जिसने पहले ही घी, पनीर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसी बुनियादी चीजों को सस्ता कर दिया है।
विदेश यात्रा के लिए टूर पैकेज पर अब कितना टैक्स लगेगा और इससे क्या फर्क पड़ेगा?
सरकार ने विदेश यात्रा पर लगने वाले TCS (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) को घटाकर अब फ्लैट 2% कर दिया है। पहले 10 लाख से अधिक के पैकेज(Budget) पर 20% टैक्स देना पड़ता था। इस बदलाव से अब अंतरराष्ट्रीय ट्रिप बुक करना काफी सस्ता हो जाएगा क्योंकि यात्रियों को शुरुआत में बड़ा ‘एडवांस टैक्स’ नहीं देना होगा।
बजट में टैक्स कम होने के बावजूद सामान तुरंत सस्ता क्यों नहीं होता?
बजट में टैक्स कटौती का असर केवल ‘नए स्टॉक’ पर पड़ता है। दुकानदार के पास पहले से मौजूद स्टॉक पुरानी कीमत पर ही बिकता है। इसके अलावा, अंतिम कीमत कंपनियों पर निर्भर करती है; कई बार कंपनियां टैक्स घटने का फायदा ग्राहकों को देने के बजाय अपना प्रॉफिट मार्जिन बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करती हैं।
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